सूरत : गैस संकट के बीच टेक्सटाइल इंडस्ट्री की पहल, मजदूरों का पलायन रोकने के लिए 24 घंटे भोजन व्यवस्था
पांडेसरा में ‘मेगा किचन’ शुरू, 50 रुपये में 5000 मजदूरों को रोज़ाना भोजन
सूरत। सूरत में कमर्शियल और घरेलू गैस की भारी कमी के चलते मजदूरों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। इस स्थिति से निपटने और मजदूरों का पलायन रोकने के लिए टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने पांडेसरा क्षेत्र में ‘मेगा किचन’ की शुरुआत की है, जहां हर दिन हजारों मजदूरों को मात्र 50 रुपये में भरपेट और सात्विक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
सूरत के पांडेसरा, सचिन और पलसाना जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं। पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडर की कमी के कारण उनके लिए घर पर खाना बनाना मुश्किल हो गया था, जिससे कई मजदूर अपने गृह राज्य लौटने की योजना बना रहे थे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों ने मिलकर पांडेसरा के एक रेस्टोरेंट को ‘मेगा किचन’ में तब्दील कर दिया। जहां पहले 1000 से 1500 लोगों के लिए भोजन बनता था, वहीं अब रोज़ाना 4000 से 5000 मजदूरों के लिए खाना तैयार किया जा रहा है। इस किचन को 24 घंटे संचालित किया जा रहा है, ताकि कोई भी मजदूर भूखा न रहे।
किचन के मैनेजर हसमुख ठक्कर के अनुसार, “मौजूदा हालात को देखते हुए क्षमता को कई गुना बढ़ाया गया है। करीब 1000 मजदूर यहां बैठकर भोजन करते हैं, जबकि बाकी लोगों के लिए पार्सल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।”
‘मील-टू-मील’ सेवा के तहत कंपनियों और यूनिट्स तक भी भोजन के पैकेट पहुंचाए जा रहे हैं, जिससे मजदूरों को बाहर जाने की जरूरत न पड़े और वे सुरक्षित तरीके से भोजन प्राप्त कर सकें।
मजदूरों ने इस पहल को राहत भरा कदम बताया है। एक मजदूर ने कहा कि गैस की कमी के कारण खाना बनाना संभव नहीं था और बाजार में गैस सिलेंडर महंगे दामों पर मिल रहे थे। ऐसे में इस व्यवस्था ने उन्हें शहर में रुकने का सहारा दिया है।
दक्षिण गुजरात टेक्सटाईल प्रोसेसर्स एसोसिएशन (एसजीटीपीए) के अध्यक्ष जीतू वखारिया ने कहा कि इंडस्ट्री हमेशा मुश्किल समय में मजदूरों के साथ खड़ी रहती है। “हमारा उद्देश्य है कि मजदूरों को किसी भी तरह की परेशानी न हो और वे सुरक्षित रहकर अपना काम जारी रख सकें,” उन्होंने कहा।
किचन के बाहर सुबह से ही मजदूरों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। भोजन वितरण के दौरान अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, साथ ही अतिरिक्त स्टाफ भी तैनात किया गया है।
प्रबंधन की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि मजदूरों को शुद्ध और पौष्टिक सात्विक भोजन मिले, ताकि उनकी सेहत पर कोई असर न पड़े। इस पहल को सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री की सामाजिक जिम्मेदारी और एकजुटता का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है।
