सूरत : श्वानों की गणना का रास्ता साफ़, पांच नाकाम कोशिशों के बाद मिली एजेंसी, ₹9.5 लाख में होगा सर्वे

शहर के हर ज़ोन और वार्ड में होगी आवारा कुत्तों की गिनती; नसबंदी, बीमारी और आबादी के अनुपात की भी तैयार होगी विस्तृत रिपोर्ट

सूरत : श्वानों की गणना का रास्ता साफ़, पांच नाकाम कोशिशों के बाद मिली एजेंसी, ₹9.5 लाख में होगा सर्वे

सूरत। सूरत शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और उनके बढ़ते आतंक के बीच सूरत नगर निगम प्रशासन के लिए एक राहत भरी खबर है।

पिछले लंबे समय से अटकी श्वानों की गणना का काम अब जल्द शुरू होने जा रहा है। पांच बार टेंडर प्रक्रिया विफल रहने के बाद, छठी कोशिश में नगर निगम को आखिरकार सर्वे के लिए एक एजेंसी मिल गई है।

छठी बार में मिली सफलता, 'ह्यूमन वर्ल्ड' को वर्क ऑर्डर

सूरत नगर निगम लंबे समय से 'एनिमल बर्थ कंट्रोल स्कीम' को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कुत्तों की सटीक संख्या जानना चाहता था। लेकिन एजेंसियों की अरुचि के कारण पांच बार टेंडर रद्द करने पड़े थे। इस बार टेंडर प्रक्रिया में 'ह्यूमन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया फाउंडेशन' आगे आई है। नगर निगम ने 9.50 लाख रुपये की लागत से इस एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है।

छह महीने में पूरा होगा सर्वे, मानसून से पहले की तैयारी

प्रशासन के अनुसार, इस पूरे सर्वे के लिए छह महीने का समय निर्धारित किया गया है। हालांकि, नगर निगम की कोशिश है कि मानसून की शुरुआत से पहले अधिक से अधिक फील्ड वर्क पूरा कर लिया जाए। टीम शहर के अलग-अलग ज़ोन और वार्डों में जाकर वैज्ञानिक पद्धति से सर्वे करेगी।

सिर्फ गिनती नहीं, 'हेल्थ डेटा' भी होगा तैयार

यह सर्वे केवल संख्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें गहन डेटा इकट्ठा किया जाएगा:

वार्ड-वार संख्या: किस इलाके में कुत्तों की आबादी कितनी है।

नसबंदी का स्टेटस: कितने कुत्तों की नसबंदी हो चुकी है और कितने बाकी हैं।

स्वास्थ्य जांच: घायल, कमजोर या स्किन इन्फेक्शन (बीमारियों) से पीड़ित कुत्तों की पहचान।

अनुपात: शहर के इलाके के हिसाब से कुत्तों की आबादी का प्रतिशत और इंसान-कुत्ता अनुपात का विश्लेषण।

भविष्य की प्लानिंग में मिलेगी मदद

इस सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर सूरत नगर निगम भविष्य में अपने नसबंदी अभियान और आवारा कुत्तों की समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार कर सकेगा।

सटीक संख्या और स्थिति का पता चलने से नसबंदी केंद्रों की कार्यक्षमता और संसाधनों के आवंटन में आसानी होगी।

शहरवासियों को उम्मीद है कि इस वैज्ञानिक सर्वे के बाद कुत्तों के काटने की घटनाओं और सड़कों पर बढ़ते खतरे से उन्हें जल्द ही राहत मिलेगी।

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