वडोदरा : एसएसजी अस्पताल में नवजात की जटिल सर्जरी सफल, डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

खाने की नली और सांस की नली आपस में जुड़ी होने की दुर्लभ जन्मजात बीमारी; विशेषज्ञ टीम ने जोखिम भरी सर्जरी कर बचाई मासूम की जान

वडोदरा : एसएसजी अस्पताल में नवजात की जटिल सर्जरी सफल, डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

वडोदरा के एसएसजी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी चिकित्सा दक्षता का परिचय देते हुए गंभीर जन्मजात बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु की सफल सर्जरी कर उसे नई जिंदगी दी है। पंचमहाल जिले के गोधरा निवासी कल्पनाबेन (24) के घर 2.600 किलोग्राम वजन का बच्चा पैदा हुआ था। जन्म के तुरंत बाद डॉक्टरों ने बच्चे में ट्रेकियो-इसोफेगल फिस्टुला नामक गंभीर बीमारी का पता लगाया।

इस दुर्लभ स्थिति में नवजात की खाने की नली (इसोफेगस) और सांस की नली (ट्रेकिया) आपस में जुड़ी होती हैं। ऐसे में बच्चे द्वारा पिया गया दूध भोजन नली की जगह सांस की नली के जरिए फेफड़ों में जाने का खतरा रहता है, जो उसके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए जन्म के मात्र 11 घंटे के भीतर उसे गोधरा से वडोदरा के एसएसजी अस्पताल के एनआईसीयू में रेफर किया गया। अस्पताल में भर्ती होते ही डॉक्टरों ने तुरंत जांच शुरू की और अगले ही दिन विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।

नवजात के पिता कल्पेशभाई ने बताया कि यह सर्जरी अत्यंत जटिल थी, क्योंकि कम वजन और संक्रमण के खतरे के बीच बच्चे की खाने की नली और सांस की नली के बीच बने असामान्य कनेक्शन को अलग करना था। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक सर्जरी कर इस जटिल समस्या को दूर किया।

सर्जरी के बाद बच्चे को 10 दिनों तक मैकेनिकल वेंटिलेटर पर रखा गया और उसकी लगातार निगरानी की गई। इस दौरान उसे एंटीबायोटिक्स दिए गए और विशेष देखभाल की गई। बाद में ‘डाई स्टडी’ जांच से यह पुष्टि हुई कि खाने की नली सही तरीके से जुड़ चुकी है और दूध सीधे पेट में जा रहा है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार निजी अस्पतालों में ऐसी एनआईसीयू सर्जरी और इलाज का खर्च प्रतिदिन लगभग 20 से 25 हजार रुपये तक होता है, जबकि एसएसजी अस्पताल में यह पूरी जटिल सर्जरी और 24 दिनों की गहन चिकित्सा सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई गई। साथ ही बच्चे की मां के लिए रहने और भोजन की भी व्यवस्था की गई।

एनआईसीयू में 24 दिनों के उपचार के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो गया है और अब मां का दूध पी रहा है। स्वास्थ्य स्थिर होने और वजन बढ़ने के बाद डॉक्टरों ने बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी।

इस सफल सर्जरी का नेतृत्व पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. ओमप्रकाश शुक्ला के मार्गदर्शन में किया गया। टीम में डॉ. रिंकी शाह, डॉ. वैशाली चनपुरा, डॉ. कश्यप पंड्या, डॉ. रवीश, डॉ. अनन्या और डॉ. रचना सहित सर्जिकल व पीडियाट्रिक विशेषज्ञ शामिल थे। अस्पताल की यह उपलब्धि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है।

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