सूरत : टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर 'युद्ध' की मार या मुनाफ़ाखोरी की चाल? यार्न की कीमतों में ₹55 तक का उछाल, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग

सचिन इंडस्ट्रियल सोसाइटी ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र; एंटी-प्रॉफिटियरिंग कमेटी और CCI से यार्न निर्माताओं के 'स्टॉक ऑडिट' की अपील

सूरत : टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर 'युद्ध' की मार या मुनाफ़ाखोरी की चाल? यार्न की कीमतों में ₹55 तक का उछाल, केंद्र से हस्तक्षेप की मांग

सूरत । युद्ध के मौजूदा हालात की आड़ में यार्न निर्माताओं द्वारा कृत्रिम तरीके से कीमतें बढ़ाने का आरोप लगाते हुए सूरत के उद्योग जगत ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

सचिन इंडस्ट्रीयल कॉ. ऑ. सोसायटी लिमिटेड  के सचिव मयूर जे. गोलवाला ने इस संबंध में प्रधानमंत्री, केंद्रीय टेक्सटाइल मंत्री, टेक्सटाइल आयुक्त मुंबई, गुजरात के मुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।

पत्र में कहा गया है कि पिछले तीन सप्ताह में पॉलिएस्टर, विस्कोस और नायलॉन यार्न की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। यह बढ़ोतरी कच्चे माल की वास्तविक लागत, उत्पादन खर्च या अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुरूप नहीं है। इससे यह आशंका मजबूत होती है कि बाजार में योजनाबद्ध तरीके से कीमतों में हेरफेर कर कृत्रिम महंगाई पैदा की जा रही है।

उद्योग जगत के अनुसार युद्ध से पहले और बाद में यार्न की कीमतों में उल्लेखनीय अंतर आया है।

उदाहरण के तौर पर पॉलिएस्टर FDY (50/48) SD की कीमत ₹107 से बढ़कर ₹137, पॉलिएस्टर FDY (50/47) ब्राइट ₹111 से बढ़कर ₹150 और पॉलिएस्टर मदर यार्न ₹107 से बढ़कर ₹150 तक पहुंच गई है। इसी तरह नायलॉन फिलामेंट यार्न ₹208 से बढ़कर ₹235 और नायलॉन मदर यार्न ₹215 से बढ़कर ₹270 तक पहुंच गया है। वहीं विस्कोस स्टेपल यार्न की कीमत ₹210 से बढ़कर ₹245 तक पहुंच गई है।

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई निर्माता रोजाना बाजार में “सेल बंद” जैसे संदेश जारी कर रहे हैं, जिससे पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बनाया जा रहा है। इससे डाउनस्ट्रीम टेक्सटाइल उद्योग में अनिश्चितता और दबाव का माहौल बन गया है।

उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि कई कंपनियां पहले से तय कम कीमत वाले यार्न सौदों का पालन नहीं कर रही हैं और ग्राहकों को बढ़ी हुई कीमतों पर नया माल खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। नायलॉन मदर यार्न के मामले में स्थिति और गंभीर बताई गई है, जहां दो महीने पहले करीब ₹195 की कीमत पर हुए सौदे अब तक पूरे नहीं किए गए हैं और खरीदारों को लगभग ₹270 की कीमत पर माल लेने का दबाव डाला जा रहा है।

इसके अलावा कुछ निर्माता पुरानी डील का केवल 50 प्रतिशत माल पुरानी कीमत पर और शेष 50 प्रतिशत बढ़ी हुई कीमत पर देने की शर्त रख रहे हैं, जिसे उद्योग जगत ने अनुचित और दबावपूर्ण बताया है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि  'ऑल इंडिया मदर यार्न मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन'  के कई सदस्यों ने 10 मार्च से पहले की सभी डील्स को “फोर्स मेज्योर” का हवाला देकर एकतरफा स्थगित कर दिया है। जबकि उद्योग जगत का दावा है कि कई स्पिनिंग यूनिट्स के पास चिप्स और अन्य कच्चे माल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

उद्योग प्रतिनिधियों ने मांग की है कि  'कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया' (CCI) और एंटी-प्रॉफिटियरिंग कमेटी इस मामले की तत्काल जांच करें। साथ ही जिन निर्माताओं द्वारा सप्लाई में हेरफेर कर कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा बड़े यार्न निर्माताओं के पास मौजूद कच्चे माल और चिप्स के स्टॉक का स्वतंत्र ऑडिट कराने तथा “फोर्स मेज्योर” के आधार पर डील्स स्थगित करने की प्रक्रिया की जांच करने की भी मांग की गई है।

उद्योग जगत का कहना है कि देश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री लाखों लूम्स, निटिंग, एम्ब्रॉयडरी और अन्य इकाइयों पर आधारित है, जिनसे लाखों लोगों को रोजगार मिलता है। ऐसे में डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के हितों की रक्षा के लिए सरकार को जल्द से जल्द हस्तक्षेप करना आवश्यक है।