अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, $119 से फिसलकर $92 पर पहुंचा क्रूड ऑयल

क्या अब भारत में सस्ते होंगे पेट्रोल और डीजल?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, $119 से फिसलकर $92 पर पहुंचा क्रूड ऑयल

नई दिल्ली, 10 मार्च (वेब वार्ता)। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में पिछले 24 घंटों के भीतर नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला है। सोमवार को $119.50 प्रति बैरल के डरावने स्तर पर पहुँचने वाला कच्चा तेल मंगलवार सुबह धड़ाम होकर $92 के करीब आ गया।

कीमतों में आई करीब 6.6% की इस भारी गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का वह बयान माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के जल्द समाप्त होने के संकेत दिए हैं।

साथ ही, रूसी राष्ट्रपति पुतिन और ट्रम्प के बीच हुई फोन वार्ता ने निवेशकों के बीच शांति की उम्मीद जगाई है, जिससे ऊंचे दामों पर बिकवाली का दौर शुरू हो गया।

एक ओर जहाँ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने तेल निर्यात ठप करने की धमकी दी है, वहीं बाजार ने इसे दरकिनार कर दिया है। इसकी वजह अमेरिका और G-7 देशों की वह रणनीति है, जिसके तहत वे अपने ‘इमरजेंसी ऑयल रिजर्व’ से लाखों बैरल तेल बाजार में छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

ट्रम्प प्रशासन रूस पर लगे तेल प्रतिबंधों में ढील देने पर भी विचार कर रहा है ताकि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति की कमी न हो। हालांकि, इराक और सऊदी अरब द्वारा उत्पादन में कटौती की आशंका अभी भी बनी हुई है, जिससे विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतें $75 से $105 के बीच अस्थिर रह सकती हैं।

भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल का $90 के करीब आना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है। यदि कीमतें इसी स्तर पर स्थिर रहती हैं, तो घरेलू तेल कंपनियां (IOCL, HPCL, BPCL) पेट्रोल और डीजल के दाम में 2 से 5 रुपये तक की कटौती कर सकती हैं।

इससे न केवल आम जनता की जेब पर बोझ कम होगा, बल्कि परिवहन लागत घटने से महंगाई पर भी लगाम लगेगी। हालांकि, अंतिम फैसला खाड़ी देशों की जमीनी स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के अगले रुख पर निर्भर करेगा।