सूरत : ड्रोन हमले की स्थिति से निपटने के लिए हजीरा पोर्ट पर मॉक ड्रिल
सूरत के हजीरा इलाके में बढ़ते तकनीकी सुरक्षा खतरों को ध्यान में रखते हुए गुजरात मैरीटाइम बोर्ड (जीएमबी)–सूरत और अदानी हजीरा पोर्ट ने मिलक ने संयुक्त रूप से ‘हवाई ड्रोन हमले’ से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए एक मॉक ड्रिल आयोजित की। यह अभ्यास हजीरा स्थित अदानी हजीरा पोर्ट के लिक्विड जेट्टी और लिक्विड टर्मिनल क्षेत्र में किया गया।
मॉक ड्रिल के दौरान दोपहर 12:10 बजे एक संदिग्ध ड्रोन द्वारा हवाई हमले की काल्पनिक स्थिति तैयार की गई। इस आपातकालीन अभ्यास के तहत तुरंत कार्गो हैंडलिंग, जहाजों की आवाजाही और क्रेन संचालन रोक दिया गया। पोर्ट की सुरक्षा इकाइयों, सीआईएसएफ और मरीन पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया तथा सभी कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए।
अभ्यास के दूसरे चरण में केमिकल कार्गो शिप और उससे जुड़े टैंक फार्म इंफ्रास्ट्रक्चर पर ड्रोन हमले की स्थिति बनाई गई, जिससे ‘हेवी एरोमैटिक केमिकल्स’ से जुड़ा संभावित खतरा दर्शाया गया। इसके बाद जिला प्रशासन के नेतृत्व में विभिन्न एजेंसियों की संयुक्त प्रतिक्रिया प्रणाली को परखा गया।
यह पूरी मॉक ड्रिल पंकज उके , चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर, अदानी हजीरा पोर्ट लिमिटेड के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। इसमें जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में डिस्ट्रिक्ट क्राइसिस ग्रुप (डीसीजी), लोकल क्राइसिस ग्रुप (एलसीजी), गुजरात मैरीटाइम बोर्ड तथा म्यूचुअल एड ग्रुप–हजीरा के साथ कई सरकारी और औद्योगिक इकाइयों ने भाग लिया।
इस अभ्यास में गुजरात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (जीपीसीबी), राज्य सरकार के डायरेक्टरेट ऑफ इंडस्ट्रियल सेफ्टी एंड हेल्थ (डीआईएसएच), सूरत पुलिस कमिश्नर कार्यालय सहित कई जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन एजेंसियों की भी भागीदारी रही।
हजीरा क्षेत्र की प्रमुख उद्योग इकाइयों शेल,एएम/एनएस इंडिया, क्रिभको, एनटीपीसी लिमिटेड, रिलायंस इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी और गैल के प्रतिनिधियों ने भी मॉक ड्रिल में हिस्सा लिया।
मॉक ड्रिल में जीएमबी के पोर्ट ऑफिसर अमित कुमार, अडानी हजीरा पोर्ट के हेल्थ, सेफ्टी एंड एनवायरनमेंट हेड आदित्य अभिषेक पांडे, लिक्विड टर्मिनल हेड गौरांग चुडासमा, चोर्यासी के मामलतदार नीरव पारितोष, पोर्ट सिक्योरिटी टीम, स्थानीय पुलिस, मरीन पुलिस और फायर विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
अंत में पूरी मॉक ड्रिल का विश्लेषण किया गया और सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक मजबूत बनाने पर चर्चा की गई। इस संयुक्त अभ्यास का उद्देश्य आपदा प्रतिक्रिया क्षमता, औद्योगिक सुरक्षा और समुदाय की सुरक्षा को बेहतर बनाना है, जिससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति का प्रभावी तरीके से सामना किया जा सके।
