सूरत : सूरत टेक्सटाइल के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय, FOSTTA के मंच पर पहली बार साथ आए GTU और VNSGU
इंडस्ट्री-एकेडेमिया मीटिंग में 'टेक्सटाइल R&D सेंटर' बनाने का प्रस्ताव; चीन को चुनौती देने के लिए 'Gen-Z' उद्यमियों को तकनीक से जोड़ने पर बनी सहमति
सूरत। टेक्सटाइल उद्योग में नवाचार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को सायं 4 बजे फेडरेशन ऑफ सूर ट्रेड एन्ड टेक्सटाइल एसोसिएशन (फोस्टा) के बोर्डरूम में एक महत्वपूर्ण इंडस्ट्री-एकेडेमिया मीटिंगआयोजित की गई।
यह बैठक गुजरात टेक्निकल युनिवर्सिटी (जीटीयू) और वीर नर्मद दक्षिण गुजरात युनिवर्सिटी (वीएनएसजीयू) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसमें MSME इकाइयों, टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े उद्यमियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स तथा इन्क्यूबेशन सेंटर के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
फोस्टा अध्यक्ष कैलास हाकिम ने अपने संबोधन में कहा कि सूरत का टेक्सटाइल उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए टेक्नोलॉजी, रिसर्च और नवाचार को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उद्योग और शिक्षा जगत के मजबूत सहयोग से नई तकनीकों, स्टार्टअप्स और आधुनिक उत्पादन प्रणालियों को बढ़ावा मिलेगा।
इस अवसर पर राजु गज्जर, वाइस चांसलर, गुजरात टेक्निकल युनिवर्सिटी, ने बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय के माध्यम से लगभग 840 स्टार्टअप संचालित हो रहे हैं और आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न फंडिंग योजनाओं के माध्यम से युवाओं को अपने नवाचार और स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में सहायता मिल रही है।
वहीं डॉ. किशोर सिंह चावडा, वाइस चांसलर, वीर नर्मद दक्षिण गुजरात युनिवर्सिटी, ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में इनोवेशन और रिसर्च के लिए विशेष भवन तैयार किया गया है। यहां विद्यार्थी और उद्योगपति मिलकर नई पहल, शोध और तकनीकी प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर सकते हैं।
फोस्टा के महामंत्री दिनेश कटारिया ने सुझाव दिया कि अहमदाबाद की तर्ज पर सूरत में भी टेक्सटाइल उद्योग के लिए R&D सेंटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाना चाहिए, जिससे नई पीढ़ी के व्यापारियों को तकनीकी प्रशिक्षण मिल सके और सूरत वैश्विक स्तर पर टेक्सटाइल हब के रूप में और मजबूत हो सके।
मीटिंग में युवा उद्यमियों संदीप केडिया, नूपुर मोदी, श्रीकांत चांडक, करण जुनेजा, कपिल पुरोहित और हितेन भाई सहित अन्य व्यापारियों ने भी अपने विचार साझा किए।
इस दौरान नेशनल प्रोडक्टीविटी काउन्सिल के डिप्टी डायरेक्टर चंदन चौधरी ने बताया कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तकनीक के माध्यम से सिलाई मशीनों से लेकर बड़ी औद्योगिक मशीनों तक को इंटरनेट से जोड़कर उनकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकती है। इससे प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, एनर्जी ऑप्टिमाइजेशन और उत्पादन क्षमता में वृद्धि संभव है। उन्होंने बताया कि गुजरात सरकार के सहयोग से RAMP योजना के अंतर्गत चयनित MSME इकाइयों को यह तकनीक निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
बैठक के दौरान ऑटोमेशन, सस्टेनेबिलिटी, जल संरक्षण, एनर्जी एफिशिएंसी, इंडस्ट्री 4.0 अपनाना, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन तथा मैन्युफैक्चरिंग में क्वालिटी इम्प्रूवमेंट जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मीटिंग में यह भी निर्णय लिया गया कि टेक्सटाइल उद्योग की समस्याओं को व्यवस्थित रूप से संकलित करने के लिए “वस्त्र उद्योग समस्या भंडार” बनाई जाएगी। साथ ही विद्यार्थियों के लिए इनोवेशन चैलेंजेस तथा एमएसएमई के लिए संयुक्त रिसर्च और कंसल्टेंसी प्रोजेक्ट्स शुरू करने पर भी सहमति बनी।
दोनों विश्वविद्यालयों ने स्पष्ट किया कि वे भविष्य में फेडरेशन ऑफ सूर ट्रेड एन्ड टेक्सटाइल एसोसिएशन (फोस्टा) के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर कार्य करना चाहते हैं, ताकि टेक्सटाइल उद्योग को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा सके और नई पीढ़ी के युवाओं को नवाचार के लिए प्रेरित किया जा सके।
इस पहल को सूरत के टेक्सटाइल उद्योग में तकनीकी उन्नयन, नवाचार और शोध आधारित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
