सूरत : पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात का सूरत की इंडस्ट्री पर साया

चैंबर ऑफ कॉमर्स ने जताई चिंता, उद्योगपतियों को ‘वेट एंड वॉच’ की सलाह

सूरत : पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात का सूरत की इंडस्ट्री पर साया

सूरत। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बने युद्ध जैसे हालातों ने वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर सूरत और दक्षिण गुजरात की प्रमुख इंडस्ट्रीज़ पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

द सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पदाधिकारियों ने इस संबंध में गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए उद्योगपतियों से सतर्क रहने की अपील की है।

डायमंड इंडस्ट्री पर सबसे बड़ा खतरा

चैंबर के प्रेसिडेंट निखिल मद्रासी ने कहा कि सूरत की डायमंड इंडस्ट्री पहले से ही चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। इज़राइल वैश्विक डायमंड ट्रेड का प्रमुख केंद्र है, ऐसे में वहां की अस्थिरता का असर सूरत में रफ डायमंड की सप्लाई पर पड़ सकता है। अमेरिका की संभावित भागीदारी से वहां लग्ज़री उत्पादों की मांग घटने की आशंका है, जिससे डायमंड और ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रभावित हो सकता है।

रूस के रफ डायमंड पर प्रतिबंध, रेड सी रूट पर बढ़ते फ्रेट और इंश्योरेंस खर्च के कारण उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है। लंबे समय तक हालात बने रहने पर जेमोलॉजिस्ट और संबंधित कर्मचारियों की नौकरियों पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही डॉलर-रुपये के उतार-चढ़ाव से निर्यातकों की चिंता और बढ़ सकती है।

टेक्सटाइल सेक्टर पर कच्चे तेल का दबाव

चैंबर के वाइस प्रेसिडेंट अशोक जीरावाला ने बताया कि सूरत का टेक्सटाइल हब मुख्य रूप से पॉलिएस्टर और मैन-मेड फाइबर (MMF) पर आधारित है, जो पेट्रोलियम उत्पाद हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे शॉर्ट टर्म में यार्न और कच्चे माल की कीमतें 15–20 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।

दुबई और खाड़ी देश सूरत के टेक्सटाइल निर्यात के प्रमुख गेटवे हैं। मौजूदा हालात के चलते शिपमेंट में देरी और पेमेंट सिक्योरिटी का जोखिम बढ़ गया है। हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय खरीदार भारत को विकल्प के रूप में देख रहे हैं, लेकिन बढ़ती लागत के बीच प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।

ऊर्जा लागत और लॉजिस्टिक्स पर असर

चैंबर के तत्कालीन पूर्व प्रेसिडेंट विजय मेवावाला ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है। समुद्री मार्गों में बाधा आने पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल, गैस और बिजली की लागत में वृद्धि होगी। इसका असर टेक्सटाइल, केमिकल, प्लास्टिक, पावरलूम और डायमंड प्रोसेसिंग जैसी ऊर्जा-आधारित इंडस्ट्रीज़ पर पड़ेगा।

ऑनरेरी मिनिस्टर बिजल जरीवाला ने कहा कि समुद्री मार्गों में रुकावट से फ्रेट चार्ज और इंश्योरेंस प्रीमियम बढ़ सकते हैं, कंटेनरों की कमी हो सकती है और एक्सपोर्ट ऑर्डर में देरी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ सकती है।

होर्मुज स्ट्रेट और महंगाई की आशंका

ऑनरेरी ट्रेजरर सीए मितेश मोदी ने कहा कि ईरान के पास स्थित होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। यदि वहां बाधा आती है तो तेल और क्रूड की सप्लाई प्रभावित होगी। क्रूड कीमतों में तेज वृद्धि से देश में महंगाई बढ़ सकती है, राजकोषीय घाटे पर दबाव आ सकता है और ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी संभव है।

उद्योग के लिए सलाह

चैंबर पदाधिकारियों ने उद्योगपतियों से फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ नीति अपनाने, खासकर खाड़ी देशों को नए ऑर्डर देते समय भुगतान शर्तों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। कच्चे माल का पर्याप्त स्टॉक रखने, वैकल्पिक बाजार तलाशने और आंतरिक दक्षता बढ़ाकर लागत नियंत्रित करने पर जोर दिया गया है।

चैंबर ने स्पष्ट किया कि यदि वैश्विक हालात लंबे समय तक बने रहते हैं तो केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष उद्योगों के लिए राहत पैकेज, ब्याज दर में छूट, निर्यात प्रोत्साहन और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं में सुधार की मांग उठाई जाएगी, ताकि सूरत की इंडस्ट्री इस चुनौतीपूर्ण दौर में स्थिरता बनाए रख सके।