टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की फील्डिंग ने बढ़ाई चिंता
ग्रुप स्टेज में टपकाए 9 कैच, सुपर-8 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सुधार की चुनौती
अहमदाबाद, 21 फरवरी (वेब वार्ता)। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अजेय रहते हुए सुपर-8 में जगह बनाने वाली भारतीय टीम के लिए खराब फील्डिंग एक गंभीर सिरदर्द बन गई है।
आंकड़ों के अनुसार, ग्रुप स्टेज के चार मैचों में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 9 कैच छोड़े हैं, जो टूर्नामेंट की 20 टीमों में आयरलैंड (10 कैच) के बाद दूसरा सबसे खराब रिकॉर्ड है।
सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में टीम का प्रदर्शन भले ही जीत के लिहाज से शानदार रहा हो, लेकिन कैचिंग डिपार्टमेंट में यह ढिलाई नॉकआउट जैसे महत्वपूर्ण मुकाबलों में भारत के लिए भारी पड़ सकती है।
टीम इंडिया के बॉलिंग कोच मोर्ने मोर्कल ने भी आगामी हाई-प्रेशर मैचों को लेकर चिंता जताई है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाले बड़े मुकाबले से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोर्कल ने स्पष्ट किया कि टूर्नामेंट के आखिरी हिस्से में कैचिंग जीत-हार का मुख्य अंतर साबित होगी।
उन्होंने कहा कि टीम फील्डिंग और बाउंड्री रोकने पर कड़ी मेहनत कर रही है, क्योंकि टी20 क्रिकेट के कड़े मुकाबलों में कोई भी कैच आसान नहीं होता और एक छोटी सी गलती पूरे मैच का पासा पलट सकती है।
भारत का मुकाबला अब रविवार (22 फरवरी) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में 2024 की उपविजेता टीम दक्षिण अफ्रीका से होगा। सुपर-8 के इस हाई-वोल्टेज मैच में भारतीय गेंदबाजों को फील्डर्स से बेहतर साथ की उम्मीद होगी।
मोर्कल ने जोर दिया कि कठिन कैच पकड़ने से टीम का मनोबल बढ़ता है और दबाव वाले मैचों में नतीजा पक्ष में आता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारतीय टीम ग्रुप स्टेज की गलतियों से सबक लेकर दुनिया की सबसे फिट टीमों में शुमार प्रोटियाज के खिलाफ अपनी फील्डिंग का स्तर सुधार पाती है या नहीं।
