राजकोट : आरोग्य धन संपदा सीरीज-3: राजकोट सिविल में दो वर्षीय बच्ची के लिवर की जटिल सर्जरी सफल
तीन एबनॉर्मल हाइडैटिड सिस्ट हटाए गए, ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद की गई चुनौतीपूर्ण लैप्रोस्कोपिक सर्जरी
राज्य सरकार की आरोग्य धन संपदा सीरीज-3 के अंतर्गत राजकोट स्थित पीडीयू जनाना सिविल हॉस्पिटल ने एक बार फिर अपनी मेडिकल एक्सपर्टीज़ का परिचय दिया है। यहां मात्र दो साल की बच्ची के लिवर में पाए गए तीन एबनॉर्मल हाइडैटिड सिस्ट की जटिल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। ऑपरेशन के बाद बच्ची अब पूरी तरह स्वस्थ है।
वांकानेर के पंचासरा गांव निवासी सरसिंह वास्केल की दो वर्षीय पुत्री नंदू को लंबे समय से बुखार, पेट दर्द और पेट फूलने की शिकायत थी। हालत गंभीर होने पर 27 जनवरी 2026 को उसे राजकोट जनाना हॉस्पिटल के पीआईसीयू में भर्ती कराया गया। पीडियाट्रिक विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच में बच्ची का लिवर असामान्य रूप से बड़ा पाया गया। इसके बाद यूएसजी और सीटी स्कैन जैसी आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं से जांच करने पर लिवर में तीन हाइडैटिड सिस्ट होने की पुष्टि हुई।
डॉक्टरों के अनुसार, ऑपरेशन से पहले बच्ची की स्थिति को स्थिर करना बेहद जरूरी था। इसके लिए पीआईसीयू की टीम ने ब्लड ट्रांसफ्यूजन देकर नंदू को स्टेबल किया। पूरी योजना अत्यंत सावधानी के साथ बनाई गई, क्योंकि यह एक अत्यंत कम उम्र के मरीज की जटिल सर्जरी थी।
29 जनवरी 2026 को बच्ची की लैप्रोस्कोपिक सर्जरी करने का निर्णय लिया गया। पीडियाट्रिक मरीजों में लैप्रोस्कोपी को लेकर चुनौतियों का उल्लेख करते हुए डॉ. पंकज बुच ने बताया कि छोटे पेट, सीमित जगह और अधिक जोखिम के कारण यह प्रक्रिया बेहद कठिन होती है। इसके बावजूद वरिष्ठ सर्जन डॉ. जयदीप गणात्रा ने कुशलतापूर्वक यह ऑपरेशन संपन्न किया।
डॉ. जयदीप गणात्रा ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान लिवर के पिछले हिस्से में मौजूद सिस्ट की पहचान सबसे बड़ी चुनौती थी। इस दौरान रेडियोलॉजी विभाग ने ऑन-टेबल लोकलाइजेशन और त्वरित जांच के माध्यम से महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।
इस सर्जरी में एनेस्थीसिया टीम के डॉ. जिगिशा, डॉ. ख्याति व उनकी टीम, ओटी टेक्नीशियन पूजाबेन वाडोलिया, ओटी इंचार्ज सिस्टर दयाबेन गजेरा, स्क्रब सिस्टर रितिका राठौड़, भार्गव मांढक, अल्पेश हेरभा तथा क्लास-4 स्टाफ दक्षाबेन रोजासरा और जाहिदाबेन मजबूल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सर्जरी के बाद बच्ची को पीआईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां वार्ड इंचार्ज सिस्टर भानुमति ताडा और उनकी टीम ने पूरे समर्पण के साथ देखभाल की। प्री-ऑप से लेकर पोस्ट-ऑप तक पीडियाट्रिक विभाग की टीम लगातार बच्ची की निगरानी करती रही।
सिविल सुपरिटेंडेंट डॉ. मोनाली मांकड़िया ने पूरी मेडिकल टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता केवल एक सर्जरी नहीं, बल्कि जनाना हॉस्पिटल की टीमवर्क, समन्वय, इंसानियत और समर्पण की जीत है। इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के माध्यम से राजकोट जनाना सिविल हॉस्पिटल ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता साबित की है।
