एमसीसी ने क्रिकेट के नियमों में किये कई बदलाव -1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे

एमसीसी ने क्रिकेट के नियमों में किये कई बदलाव -1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे

लंदन, 04 फरवरी (वेब वार्ता)। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने क्रिकेट के नियमों में कई बदलाव किये हैं। एमसीसी के नियमों में किये गये बदलावों से खेल पर भी प्रभाव पड़ना तय है।

एमसीसी के अनुसार 9 नियमों में बदलाव किया गया है। इससे मैच की रणनीति, खिलाड़ियों के प्रदर्शन और अंपायरिंग पर भी प्रभाव पड़ेगा। ये नियम आधिकारिक तौर पर 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे।

जूनियर और महिला क्रिकेट में गेंद के आकार में किया गया बदलाव
एमसीसी के अनुसार महिला और जूनियर क्रिकेट में खिलाड़ियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग साइज और वजन की गेंदों का उपयोग होगा। एमसीसी के अनुसार, गेंद अब साइज 1, साइज 2 और साइज 3 में रहेगी। साइज 1 गेंद पुरुष क्रिकेट के लिए रहेगी जबकि बाकी अन्य महिला क्रिकेट और जूनियर वर्ग में उपयोग की जाएगी।

लैमिनेटेड बल्लों के उपयोग की अनुमति दी
वहीं एमसीसी ने ओपन एज क्रिकेट में लैमिनेटेड बल्लों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। इन बल्लों में लकड़ी के तीन टुकड़ों का उपयोग किया जा सकता है। परीक्षण के दौरान यह साफ हुआ कि इन बल्लों से प्रदर्शन में कोई अधिक अंतर नहीं पड़ता। अंतरराष्ट्रीय क्रिके ट में हालांकि में अब भी एक ही लकड़ी से बने बल्ले इस्तमाल किये जाएंगे।

हिट विकेट के नियम में आया अंतर
अगर बल्लेबाज या उसका कोई उपकरण किसी फील्डर से टकराकर स्टंप्स से लगता है, तो उसे हिट विकेट नहीं माना जाएगा पर यदि बल्लेबाज शॉट खेलते समय स्वयं स्टंप्स से टकराता है, तो वह हिट विकेट होगा।

रन आउट और स्टंपिंग नियम में भी बदलाव
रन आउट और स्टंपिंग नियम में भी बदलाव किया गया है। इसके तहत ही अब रन आउट और स्टंपिंग तभी मानी जाएगी जब गेंद पूरी तरह फील्डर या विकेटकीपर के हाथ में हो।

अंतिम ओवर में विकेट गिरने पर नहीं रुकेगा खेल 
अब मल्टी-डे क्रिकेट में दिन के अंतिम ओवर के दौरान विकेट गिरने पर खेल रोका नहीं जाएगा और उस ओवर की बची हुई सभी गेंदें फेंकी जाएंगी। उसके बाद ही दिन का खेल समाप्त होगा। इससे गेंदबाजी टीम को पूरा अवसर मिलेगा।

अधूरा रन लेने पर सख्ती
अगर बल्लेबाज जानबूझकर अधूरा रन लेते हैं, तो फील्डिंग टीम यह तय कर सकेगी कि अगली गेंद पर कौन बल्लेबाज स्ट्राइक पर रहेगा। इस नियम का मकसद बल्लेबाजों को गैरजरुरी लाभ लेने से रोकना है।

सीमा रखा पर कैच का नियम बदला
सीमा रेखा के पास कैच लेते समय अब फील्डर को सिर्फ एक मौका मिलेगा। वह गेंद को बार-बार हवा में उछालकर बाउंड्री के बाहर से अंदर नहीं ला सकेगा। फील्डर को या तो खुद कैच लेना होगा या एक ही बार में अपने साथी की ओर गेंद को धकेलना होगा।

ओवरथ्रो को लेकर भी बदला नियम
अगर थ्रो के बाद गेंद बिना किसी फील्डर के प्रयास के आगे निकल जाती है, तो उसे ओवरथ्रो माना जाएगा पर यदि फील्डर गेंद को रोकने की कोशिश करता है और सफल नहीं होता है तो वह मिसफील्ड मानी जाएगी।

गेंद के ‘सैटल’ होने के नियम में बदलाव
अब गेंद का विकेटकीपर या गेंदबाज के हाथ में जाना जरूरी नहीं होगा। अगर कोई फील्डर स्थिर अवस्था में गेंद को नियंत्रित करता है, तो अंपायर उसे डेड बॉल या सैटल गेंद मान सकते हैं।

कीपर का स्टंप्स के पीछे होना जरूरी
अगर गेंदबाज रन-अप में है और उस समय विकेटकीपर के दस्ताने स्टंप्स के आगे हैं, तो गेंद नो- बॉल नहीं होगी। हालांकि गेंद फेंके जाने के समय कीपर का स्टंप्स के पीछे होना जरूरी रहेगा।

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