अमेरिका-भारत साझेदारी मंच ने किया ट्रम्प की व्यापार संबंधी घोषणा का स्वागत

अमेरिका-भारत साझेदारी मंच ने किया ट्रम्प की व्यापार संबंधी घोषणा का स्वागत

वॉशिंगटन, 03 फरवरी (वेब वार्ता)। अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच हुई बातचीत के बाद की गयी व्यापार संबंधी घोषणा का मंगलवार को स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने सोमवार देर रात भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

घोषणा के तहत भारत पर लगाये जाने वाले पारस्परिक आयात शुल्क (रेसिप्रोकल टैरिफ) को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किये जाने का प्रावधान है, जिसे दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहला कदम माना जा रहा है।

समझौते का विस्तृत स्वरूप अभी सामने नहीं आया है, यूएसआईएसपीएफ ने कहा कि यह कदम दोनों पक्षों की ओर से एक व्यापक भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की दिशा में मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को दर्शाता है।

प्रस्तावित बीटीए में शुल्क, बाजार पहुंच, गैर-शुल्क बाधाएं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अन्य व्यापारिक मुद्दे शामिल होंगे। मंच के अनुसार, पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते से दोनों देशों के व्यवसायों, श्रमिकों और उपभोक्ताओं को लाभ मिल सकता है, साथ ही आपूर्ति शृंखलाओं और आर्थिक मजबूती को भी बल मिलेगा।

यूएसआईएसपीएफ ने बताया कि दोनों देशों की सरकारों ने संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में वार्ता के अतिरिक्त चरण और बातचीत होने की संभावना है। मंच ने इस घोषणा से उत्पन्न सकारात्मक गति पर आशा व्यक्त करते हुए दोनों सरकारों के साथ मिलकर द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

यूएसआईएसपीएफ ने यह भी कहा कि मजबूत भारत-अमेरिका व्यापार और निवेश संबंध न केवल आर्थिक विकास के लिए, बल्कि स्थिर, मजबूत और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

इससे पहले, राष्ट्रपति ट्रम्प ने कल भारत के साथ एक नए व्यापार समझौते की घोषणा की थी, जिसके तहत भारतीय वस्तुओं पर शुल्क में उल्लेखनीय कटौती की गई है।

यह समझौता भारत द्वारा रूसी तेल आयात में कटौती के निर्णय की पृष्ठभूमि में सामने आया है, जिस पर श्री ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी के बीच चर्चा हुई थी।समझौते के अनुसार, अमेरिका भारत से आयातित वस्तुओं पर पारस्परिक आयात शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा।

इससे पहले शुल्क 50 प्रतिशत तक बढ़ जाने के कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि भारत के रूसी तेल आयात से जुड़े अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क हटा लिए जाएंगे और केवल नया कम किया गया शुल्क ही लागू रहेगा।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर इस घोषणा की जानकारी दी और कहा कि शुल्क में कटौती तत्काल प्रभाव से लागू होगी।

उन्होंने सोशल मीडिया ट्रुथ पर लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी के प्रति मित्रता और सम्मान के तहत तथा उनके अनुरोध पर, हमने भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते पर सहमति जताई है, जिसके तहत अमेरिका पारस्परिक शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा।”

प्रधानमंत्री मोदी ने भी अमेरिका द्वारा ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने की घोषणा को द्विपक्षीय व्यापार के लिए बड़ा प्रोत्साहन बताया।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ हुई बातचीत को “शानदार” बताया और भारतीय निर्यातकों और उपभोक्ताओं के लिए इसे एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया।प्रधानमंत्री ने लिखा, “भारत में बने उत्पादों पर आयात शुल्क घटकर 18 प्रतिशत होने से बेहद प्रसन्न हूं। इस महत्वपूर्ण घोषणा के लिए भारत के 1.4 अरब लोगों की ओर से राष्ट्रपति ट्रम्प का आभार।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया की दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग से व्यापार, निवेश और नवाचार के नए अवसर खुलेंगे।

उन्होंने कहा, “जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र मिलकर काम करते हैं, तो इससे हमारे लोगों को लाभ होता है और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग की अपार संभावनाएं खुलती हैं।”

शुल्क कटौती के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों का तत्काल विवरण उपलब्ध नहीं हो पाया है लेकिन माना जा रहा है कि इससे विशेष रूप से उन भारतीय निर्माताओं और निर्यातकों को राहत मिलेगी, जिन्हें हाल के वर्षों में अमेरिकी बाजार में ऊंचे शुल्क का सामना करना पड़ा है।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह भी कहा कि भारत अमेरिकी उत्पादों की खरीद बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि सहित अन्य क्षेत्रों के 500 अरब डॉलर से अधिक के उत्पाद शामिल हैं। इसके साथ ही भारत द्वारा अमेरिकी निर्यात पर आयात शुल्क और गैर-शुल्क बाधाएं हटाने पर भी सहमति जताई है।