विल ऑन व्हील्ज़: हादसे से हौसले तक - निशांत खाड़े ने व्हीलचेयर पर 25 साल पूरे होने पर मनाया जज़्बे का जश्न

विल ऑन व्हील्ज़: हादसे से हौसले तक - निशांत खाड़े ने व्हीलचेयर पर 25 साल पूरे होने पर मनाया जज़्बे का जश्न

मुंबई (महाराष्ट्र), जनवरी 31: रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट के बाद ज़िंदगी के 25 साल पूरे करने पर निशांत खाड़े ने व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं की कम्युनिटी के लिए एक प्रेरणादायक कार्यक्रम ‘विल ऑन व्हील्ज़’ का आयोजन किया।

यह कार्यक्रम 25 जनवरी 2026 को नेरुल स्थित कोर्टयार्ड बाय मैरियट में आयोजित हुआ, जिसमें परिवार, दोस्त, डॉक्टर, थेरेपिस्ट, मेंटर और दिव्यांगता से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

निशांत खाड़े द्वारा स्वयं कल्पित और आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ़ एक उत्सव नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का मंच था, जिन्होंने उनके एक्सीडेंट के बाद के संघर्ष, पुनर्वास और नए जीवन निर्माण के सफ़र में साथ दिया।

इस अवसर पर निशांत खाड़े ने कहा, “विल ऑन व्हील्ज़ मेरा धन्यवाद कहने का तरीका है। यह याद दिलाने का प्रयास है कि चोट लगने के बाद ज़िंदगी रुकती नहीं, बल्कि एक नए रूप में आगे बढ़ती है। व्हीलचेयर ने मेरे चलने का तरीका बदला है, लेकिन मेरे सपनों, योगदान और मकसद को नहीं।”

गौरतलब है कि वर्ष 2001 में मात्र 23 वर्ष की उम्र में निशांत को स्पाइनल कॉर्ड इंजरी हुई थी, जिसके बाद उन्हें व्हीलचेयर पर निर्भर होना पड़ा। यह हादसा उनके जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक ऐसा मोड़ साबित हुआ, जिसने उन्हें नई सोच, उद्देश्य और सामाजिक योगदान की दिशा दी।

निशांत के पुनर्वास और मानसिक मजबूती के सफ़र में नीना फ़ाउंडेशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। फ़ाउंडेशन ने उन्हें संरचित रिहैबिलिटेशन, भावनात्मक सहयोग और आवश्यक संसाधनों तक पहुँच उपलब्ध कराई। नीना फ़ाउंडेशन की डॉ. केतना मेहता ने कहा, “निशांत की यात्रा यह दर्शाती है कि मेडिकल केयर, भावनात्मक सहयोग और दीर्घकालिक पुनर्वास मिलकर किस तरह आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान को संभव बनाते हैं।”

कार्यक्रम की शुरुआत वेलकम एड्रेस से हुई, जिसके बाद एक ऑडियो-विज़ुअल फ़िल्म के माध्यम से निशांत के एक्सीडेंट से पहले और बाद के 25 वर्षों के संघर्ष, हास्य, हिम्मत और विकास के पलों को दर्शाया गया। इसके बाद निशांत ने जीवन में स्वीकार्यता, चुनाव और उद्देश्य पर अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम में स्पाइनल कॉर्ड इंजरी पर एक पैनल डिस्कशन भी आयोजित हुआ, जिसमें डॉ. केतना मेहता, शिवजीत सिंह राघव, अरविंद रमेश प्रभु, डॉ. प्रवीण आर. अमीन और निशांत खाड़े ने पुनर्वास, समावेशन और आत्मनिर्भरता पर चर्चा की।

इस दौरान Access4All फ़ाउंडेशन पर भी प्रकाश डाला गया, जिसकी स्थापना निशांत खाड़े और अरविंद प्रभु ने की है। यह पहल दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर-फ्रेंडली परिवहन, प्रशिक्षित स्टाफ़ और समावेशी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है।

इसके अलावा, दोनों द्वारा शुरू की गई देशव्यापी व्हीलचेयर यात्रा ‘बियॉन्ड द बैरियर’ का भी उल्लेख किया गया, जिसका उद्देश्य दिव्यांगता और आज़ादी को लेकर सामाजिक सोच बदलना है।

कार्यक्रम का समापन सम्मान समारोह के साथ हुआ, जिसमें निशांत के जीवन-सफर में योगदान देने वाले डॉक्टरों, थेरेपिस्ट्स, मेंटर्स और सहयोगियों को सम्मानित किया गया।

‘विल ऑन व्हील्ज़’ यह संदेश छोड़ गया कि रीढ़ की हड्डी की चोट के बाद भी ज़िंदगी न सिर्फ़ संभव है, बल्कि उद्देश्यपूर्ण, गरिमामय और प्रेरणादायक भी हो सकती है।

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