सूरत : कवच सिस्टम से रुकेंगे ट्रेन हादसे, उधना–जलगांव रूट पर टेक्नोलॉजी लगाने को रेलवे की हरी झंडी
306 किमी लंबे तापी सेक्शन पर 483.65 करोड़ रुपये की योजना, उधना से गुजरने वाली 60 ट्रेनों को मिलेगा सीधा लाभ
सूरत। ट्रेन हादसों को रोकने और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए रेलवे लगातार आधुनिक तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में रेलवे ने उधना–जलगांव के बीच 306 किलोमीटर लंबे तापी सेक्शन रूट पर कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम लगाने को हरी झंडी दे दी है।
मिली जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद–मुंबई मेन रेलवे लाइन के बाद अब उधना–जलगांव रूट को कवच सिस्टम से लैस किया जाएगा। इस परियोजना से न सिर्फ ट्रेन दुर्घटनाओं पर लगाम लगेगी, बल्कि इस रूट से सफर करने वाले यात्रियों और आसपास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को भी सुरक्षा का बड़ा फायदा मिलेगा।
रेलवे के मुताबिक, उधना–जलगांव तापी सेक्शन पर कवच सिस्टम लगाने में करीब 109.83 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा, वेस्टर्न रेलवे के 436 लोकोमोटिव में जरूरी तकनीकी बदलाव और अपग्रेडेशन के लिए 373.82 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस तरह, रेल मंत्रालय के अम्ब्रेला वर्क प्लान 2024–25 के तहत इस पूरी योजना के लिए कुल 483.65 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
कवच सिस्टम लागू होने के बाद उधना से चलने वाली या इस रूट से गुजरने वाली लगभग 60 मेल, एक्सप्रेस, पैसेंजर और MEMU ट्रेनों को सीधा फायदा होगा। योजना के तहत सभी 436 लोकोमोटिव को कवच सिस्टम के अनुरूप पूरी तरह कम्पैटिबल बनाया जा रहा है, जिससे ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
कवच एक स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन सेफ्टी सिस्टम है, जिसे भारतीय रेलवे ने विकसित किया है। यह सिस्टम ट्रेन ड्राइवर से होने वाली किसी भी मानवीय चूक की स्थिति में भी हादसों को रोकने में सक्षम है।
अगर ट्रेन सिग्नल तोड़ती है, तो कवच सिस्टम अपने आप ब्रेक लगा देता है। आमने-सामने से आने वाली ट्रेनों के बीच टक्कर की स्थिति में यह सिस्टम दुर्घटना को टाल देता है। तय सीमा से अधिक स्पीड होने पर भी यह ट्रेन को कंट्रोल कर सकता है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में रेलवे सेफ्टी सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में रेल यात्रा और ज्यादा सुरक्षित हो सकेगी।
