ट्रंप ने ईरान से व्यापार पर 25 फीसदी टैरिफ थोपा
वाशिंगटन/नई दिल्ली, 13 जनवरी (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात ईरान में महंगाई और सत्ता के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के सशस्त्र दमन के मद्देनजर कार्रवाई करते हुए ईरान से किसी भी तरह का व्यापार करने पर रोक लगाने का फरमान जारी कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि ईरान से व्यापार करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ अपने हर व्यापार पर 25 फीसदी टैरिफ देगा। उन्होंने कहा कि यह आदेश अंतिम है और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। ट्रंप के इस कदम को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश के तहत देखा जा रहा है।
ईरान में दो हफ्ते से ज्यादा समय से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप बार-बार प्रदर्शनों में दखल देने की धमकी ईरान सरकार को दे रहे हैं। ट्रंप का यह कदम सीधे तौर पर ईरान की सरकार पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है, लेकिन इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। भारत, चीन, रूस, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कई देश ईरान के बड़े व्यापारिक भागीदार हैं। ऐसे में इन देशों को अब अमेरिका और ईरान के बीच किसी एक को चुनने की मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
भारत पर अमेरिका ने पहले ही 50 फीसदी टैरिफ लगा हुआ है। नया टैरिफ भारत-अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है। हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि इस नीति को कैसे लागू किया जाएगा। ऐसे में इस आदेश ने दुनिया के बड़े हिस्से में हलचल पैदा कर दी है। ईरान के साथ ₹1.52 लाख करोड़ का व्यापार भारत-ईरान के बीच लंबे समय से व्यापारिक संबंध हैं। बीते कुछ समय में ईरान के कच्चे तेल पर प्रतिबंध बाद दोनों देशों के बीच व्यापार का स्वरूप बदला है।
भारत-ईरान के बीच व्यापार का दायरा अब गैर तेल उत्पादों में बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ईरान के बीच कुल व्यापार लगभग 1.68 बिलियन डॉलर रहा था। भारत का सबसे बड़ा बासमती चावल खरीदार ईरान भारत का सबसे बड़ा बासमती चावल खरीदार है। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल-नवंबर के दौरान ईरान को 468.10 अमेरिकी डॉलर का बासमती चावल निर्यात किया जिसकी कुल मात्रा 5.99 लाख टन थी। भारत से ईरान जाने वाले उत्पाद भारत से ईरान को मुख्य रूप से कृषि और उपभोक्ता उत्पाद भेजे जाते हैं। इसमें बासमती चावल एक अहम उत्पाद है। इसके अलावा चाय और चीनी की भी ईरान में अच्छी खासी मांग है। भारतीय दवाइयों की भी वहां मार्केट में मजबूत हिस्सेदारी है। फल और अन्य खाद्य उत्पाद भी भारत के प्रमुख निर्यात उत्पाद हैं। ईरान से भारत आने वाले उत्पाद ईरान से भारत मुख्य रूप से खजूर और सूखे मेवे आयात करता है इसमें पिस्ता और बादाम शामिल हैं।
इसके अलावा कुछ पेट्रोकेमिकल उत्पाद भी भारत आते हैं। पहले ईरान भारत का बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते तेल आयात लगभग बंद हो गया। दोनों देशों का व्यापार वर्ष निर्यात आयात द्विपक्षीय व्यापार 2018-19 3.51 13.53 17.03 2019-20 3.38 1.39 4.77 2020-21 1.77 0.33 2.10 2021-22 1.45 0.46 1.91 2022-23 1.66 0.67 2.33 2023-24 1.22 0.62 1.85 2024-25 1.24 0.44 1.68 (अरब डॉलर में) इन देशों पर सबसे ज्यादा
असर चीन:ईरान का सबसे बड़ा तेल और व्यापारिक साझेदार।
यूरोपीय यूनियन: जर्मनी और इटली जैसे यूरोपीय देश ईरान से करते हैं व्यापार
तुर्किये: ईरान से तेल और गैस आयात करता है।
संयुक्त अरब अमीरात: ईरान का दूसरा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार।
रूस: सैन्य, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्रों में मिलकर काम करते हैं। इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान जैसे देश भी ईरान से व्यापार करते हैं। चाबहार को लेकर दुविधा बढ़ेगी भारत-ईरान संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू चाबहार बंदरगाह का संयुक्त विकास है। ऊर्जा से भरपूर ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित इस बंदरगाह का विकास भारत और ईरान द्वारा संपर्क एवं व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। पहले अमेरिका इस पर सख्त था, लेकिन हाल ही में भारत को चाबहार बंदरगाह पर परिचालन जारी रखने के लिए छह महीने छूट दी गई थी। यह प्रतिबंध छूट 29 अक्तूबर से प्रभावी है। इस छूट को भारत के लिए एक कूटनीतिक जीत के रूप में देखा गया लेकिन अब डोनाल्ड ट्रंप के 25% टैरिफ के ऐलान ने भारत को इस दिशा में बड़ा झटका दिया है।
