सूरत : वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीणभाई माली ने मांडवी में इको-टूरिज्म व विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन

केवड़ी इको टूरिज्म साइट पर ‘रूरल मॉल’ और गुली उमर फॉरेस्ट चौकी में वाइल्ड पोल्ट्री ब्रीडिंग सेंटर का लोकार्पण

सूरत : वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीणभाई माली ने मांडवी में इको-टूरिज्म व विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन

वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री  प्रवीणभाई माली ने रविवार को सूरत फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के मांडवी साउथ रेंज अंतर्गत दो महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें मांडवी तालुका की केवड़ी इको टूरिज्म साइट पर विसडालिया क्लस्टर के ‘रूरल मॉल’ आउटलेट तथा मांडवी रेंज के गुली उमर फॉरेस्ट चौकी में नवनिर्मित वाइल्ड पोल्ट्री ब्रीडिंग सेंटर शामिल हैं। इन दोनों परियोजनाओं पर कुल 65 लाख रुपये की लागत आई है।

इन्फॉर्मेशन ब्यूरो, सूरत के अनुसार, गुली उमर फॉरेस्ट चौकी में 50 लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए वाइल्ड पोल्ट्री ब्रीडिंग सेंटर का उद्घाटन करते हुए मंत्री श्री माली ने कहा कि यह केंद्र वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, केवड़ी इको टूरिज्म साइट पर 15 लाख रुपये की लागत से स्थापित ‘रूरल मॉल’ आउटलेट ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर सृजित करेगा।

उद्घाटन के पश्चात वन मंत्री ने केवड़ी इको टूरिज्म साइट पर आए पर्यटकों से संवाद कर उनकी सुविधाओं और अनुभवों को लेकर फीडबैक लिया। साथ ही उन्होंने वन अधिकारियों के साथ मांडवी साउथ रेंज के वन क्षेत्र का निरीक्षण किया और गुली उमर फॉरेस्ट चौकी परिसर में पौधारोपण भी किया।

इस अवसर पर विधायक कुंवरजीभाई हलपति, कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (सूरत सर्कल) पुनीत नैयर, कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (भरूच सर्कल, सोशल फॉरेस्ट्री) आनंद कुमार, डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (सोशल फॉरेस्ट्री, सूरत) मित्तल सावंत, डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (व्यारा) सचिन गुप्ता, रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर एच. जे. वांडा, असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स  एच. आर. जादव सहित फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

केवड़ी इको-टूरिज्म साइट पर स्थापित विसडालिया क्लस्टर का ‘रूरल मॉल’ (हैंडीक्राफ्ट सेल्स सेंटर) ग्रामीण और आदिवासी कारीगरों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराएगा। यहां हस्तशिल्प वस्तुएं, बांस से बने फर्नीचर, बेकरी उत्पाद, मसाले, पापड़, मशरूम एवं आयुर्वेदिक उत्पादों की बिक्री की जाएगी। इससे आदिवासी महिलाओं और स्थानीय कारीगरों को आर्थिक सहायता मिलेगी, उनकी आय में वृद्धि होगी और ‘द रूरल मॉल’ के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती के साथ स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

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