वडोदरा : मुख्यमंत्री पौष्टिक अल्पाहार योजना से वडोदरा में मजबूत हो रहा बच्चों का भविष्य
1090 सरकारी स्कूलों के 15,170 विद्यार्थियों को मिल रहा नियमित पौष्टिक नाश्ता, बढ़ी उपस्थिति और पढ़ाई में रुचि
एक कहावत चरितार्थ है कि “खाली पेट जब भजन नहीं होते”, तो यह भी उतना ही सत्य है कि खाली पेट पढ़ाई भी नहीं हो सकती। विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए आज बच्चों का स्वस्थ और पोषित होना बेहद आवश्यक है। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल द्वारा पौष्टिक गुजरात मिशन के अंतर्गत शुरू की गई मुख्यमंत्री पौष्टिक अल्पाहार योजना बच्चों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभा रही है।
इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों को प्रतिदिन पौष्टिक नाश्ता उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना मिड-डे मील के अतिरिक्त एक पूरक व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य बच्चों की सेहत के साथ-साथ उनकी शैक्षणिक क्षमता को भी मजबूत करना है।
वडोदरा जिले में मिड-डे मील योजना और जिला शिक्षा विभाग के समन्वय से इस योजना का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के कुल 1090 सरकारी स्कूलों में 15,170 विद्यार्थी नियमित रूप से पौष्टिक नाश्ता ले रहे हैं। योजना के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं—स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ी है, बच्चों की ऊर्जा और सतर्कता में सुधार हुआ है तथा कक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी भी बढ़ी है।
करजन तालुका के लाकोदरा स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य जयदीप सिंह गोहिल ने बताया कि पहले कई बच्चे बिना नाश्ता किए स्कूल आते थे, जिससे वे थके हुए और असावधान रहते थे। अब स्कूल में ही पौष्टिक नाश्ता मिलने से बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई में रुचि दोनों बढ़ी हैं। यह योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए वरदान साबित हुई है। बच्चों की शारीरिक फिटनेस बढ़ने के साथ उनकी मानसिक सेहत और शैक्षणिक प्रदर्शन में भी सुधार देखा गया है।
विद्यालय की कक्षा 8 की छात्रा कीर्ति गोहिल ने बताया कि स्कूल में मिलने वाला नाश्ता स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है। ब्रेकफास्ट और मिड-डे मील दोनों का वे सभी विद्यार्थी आनंद लेते हैं और घर की तुलना में स्कूल में ज्यादा विविधता मिलती है।
जिला आपूर्ति अधिकारी गीताबेन देसाई ने कहा कि मुख्यमंत्री पौष्टिक अल्पाहार योजना एक कल्याणकारी पहल के रूप में आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में सक्रिय योगदान दे रही है।
जिला प्रशासन, शिक्षकों और रसोई कर्मचारियों के संयुक्त प्रयासों से यह योजना निरंतर सफलता की ओर बढ़ रही है। पोषण और शिक्षा को जोड़ने वाली यह योजना गुजरात को सुपोषित और शिक्षित राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन में सही पोषण से शारीरिक विकास, मानसिक क्षमता, स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है तथा स्कूल ड्रॉपआउट दर में भी कमी आती है। अच्छी तरह से पोषित बच्चा ही ज्ञान को बेहतर ढंग से आत्मसात कर सकता है।
