भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात में 3.66% की वृद्धि

वित्त वर्ष 2025–26 की पहली छमाही में 14.09 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा निर्यात: जीजेईपीसी

भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात में 3.66% की वृद्धि

सूरत। भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात ने वित्त वर्ष 2025–26 की पहली छमाही में स्थिर सुधार दर्ज करते हुए 3.66% की वृद्धि के साथ 14.09 अरब अमेरिकी डॉलर का स्तर प्राप्त किया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 13.60 अरब अमेरिकी डॉलर था।

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद यह वृद्धि भारत के आभूषण निर्यातकों की दृढ़ता और अनुकूलन क्षमता को दर्शाती है, क्योंकि त्योहारी एवं विवाह सीजन की मांग ने रफ्तार पकड़ ली है।

सिर्फ सितंबर 2025 में ही कुल निर्यात 6.55% बढ़कर 2.91 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो कई महीनों की अस्थिरता के बाद बाज़ार भावना में सुधार का संकेत देता है।

रत्न एवं आभूषण निर्यात प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए, जीजेईपीसी के अध्यक्ष श्री किरीट भंसाली ने कहा,“वित्त वर्ष की पहली छमाही उद्योग के लिए पुनरुद्धार के उत्साहजनक संकेत प्रस्तुत करती है। संयुक्त अरब अमीरात, हांगकांग और यूनाइटेड किंगडम जैसे प्रमुख बाजारों में रत्न एवं आभूषण उत्पादों की मांग में निरंतर मजबूती आई है, जिससे निर्यात में स्थिर वृद्धि दर्ज हुई है।

भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच आगामी त्योहारी और विवाह सीजन के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में अवकाश अवधि की मांग, आने वाली तिमाही में इस सकारात्मक रफ्तार को और आगे बढ़ाने की संभावना रखती है।

हालाँकि, संयुक्त राज्य अमेरिका — जो भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण बाज़ार है — शुल्क संबंधी कारणों से चुनौतियों का सामना करता रहा। अप्रैल से सितंबर 2025 की अवधि के दौरान, अमेरिका को कुल निर्यात में 40.28% की गिरावट दर्ज की गई, जो घटकर 2,770.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि कट और पॉलिश डायमंड केनिर्यात में 53.62% की गिरावट आई और यह घटकर 1,175.09 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया।

इस पर टिप्पणी करते हुए, श्री किरीट भंसाली ने कहा,“अमेरिकी बाज़ार को आपूर्ति करने वाले निर्यातक और निर्माता वर्तमान शुल्क स्थिति के कारण भारी दबाव का सामना कर रहे हैं। इस संदर्भ में जीजेईपीसी भारत सरकार के साथ लगातार चर्चा व महत्वपूर्ण कार्यों में लगा हुआ है। परिषद सरकार के साथ मिलकर ऐसे व्यावहारिक और राहत-उन्मुख उपायों की वकालत कर रही है जो इस क्षेत्र को स्थिरता प्रदान कर सकें।

मुख्य सिफारिशों में कार्यशील पूंजी ऋणों पर ब्याज स्थगन, प्री-शिपमेंट वित्त में राहत, ब्याज समानिकीकरण योजना (Interest Equalisation Scheme) का विस्तार, एसईज़ेड में रिवर्स जॉब वर्क की अनुमति, एसईज़ेड से घरेलू शुल्क क्षेत्र (DTA) में बिक्री की अनुमति, तथा प्रभावित एमएसएमई के लिए तरलता सहायता पैकेज की व्यवस्था शामिल है।

 उन्होंने आगे कहा,“कारीगरों के हितों की रक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमने प्रभावित कारीगरों के लिए रियायती ऋण और लिक्विडीटी, व्यक्तिगत ऋणों के रिस्ट्रक्चरिंग , प्रत्येक बालिका के लिए ₹1,000 की शैक्षणिक सहायता राशि, तथा स्वास्थ्य कवरेज के लिए अस्थायी रूप से आयुष्मान भारत योजना में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। इन उपायों का उद्देश्य आर्थिक दबाव को कम करना और सामान्य स्थिति बहाल होने तक आवश्यक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।

भविष्य की संभावनाओं पर टिप्पणी करते हुए श्री भंसाली ने कहा,“वैश्विक खुदरा बाजार अपने सबसे व्यस्त तिमाही में प्रवेश कर रहे हैं, और हमें उम्मीद है कि आने वाले कुछ महीनों में निर्यात प्रदर्शन और मजबूत होगा। शिल्प कौशल और बड़े पैमाने की उत्पादन क्षमता से सशक्त भारत की विश्वसनीय सोर्सिंग डेस्टिनेशन के रूप में प्रतिष्ठा लगातार अंतरराष्ट्रीय मांग को बढ़ा रही है।

गोल्ड ज्वेलरी के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि ( प्लेन और स्टेडडज्वेलरी दोनों शामिल)

अप्रैल–सितंबर 2025 की अवधि में गोल्ड ज्वेलरी निर्यात में 21.97% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़कर 5.79 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 4.75 अरब अमेरिकी डॉलर था।

  • प्लेन गोल्ड ज्वेलरी (Plain Gold Jewellery) का निर्यात 46.74% बढ़कर 2.80 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जिसका श्रेय बढ़ती सोने की कीमतों और मध्य पूर्व के बाज़ार से प्राप्त मजबूत ऑर्डरों को जाता है।
  • स्डेड ज्वेलरी का निर्यात 5.35% बढ़कर 3.00 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा।


अप्रैल–सितंबर 2025 के दौरान यूएई को प्लेन औऱ स्डेड ज्वेलरी का कुल निर्यात 61.37% बढ़कर 3,192.87 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,978.55 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। इससे एक बार फिर यूएई की भारत के आभूषणों के लिए प्रमुख बाज़ार के रूप में स्थिति सुदृढ़ हुई।यूनाइटेड किंगडम को निर्यात 17.01% बढ़कर 155.50 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो स्थिर खुदरा मांग और भारतीय डिज़ाइन की बढ़ती सराहना से प्रेरित था।इस बीच, सऊदी अरब को निर्यात में 124.10% की वृद्धि दर्ज की गई, जो बढ़कर 128.90 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया — यह आँकड़ा इस बात का प्रमाण है कि भारतीय आभूषणों के प्रति सऊदी अरब की रुचि लगातार बढ़ रही है और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध मजबूत हो रहे हैं।

अप्रैल–सितंबर 2025 की अवधि मेंसोने की औसत कीमत वर्ष-दर-वर्ष लगभग 36% बढ़ी, जो वैश्विक बाजार की स्थिति और निवेशकों के भरोसे में वृद्धि को दर्शाती है।

अप्रैल–सितंबर 2025 के दौरान कट और पॉलिश हीरे के निर्यात 9.57% घटकर 6.25 अरब अमेरिकी डॉलर रहे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 6.91 अरब अमेरिकी डॉलर थे।
हालाँकि, सितंबर माह के आँकड़े सुधार के शुरुआती संकेत दिखाते हैं, क्योंकि मासिक निर्यात 5.91% बढ़कर 1.37 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।

अप्रैल–सितंबर 2025 की अवधि में अमेरिका को कट और पॉलिश डायमंड का निर्यात 53% घटकर 1,175.09 मिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया।
वहीं, यूएई को भेजे गए शिपमेंट में 65.23% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और यह 1,299.71 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा, जो दुबई की वैश्विक हीरा व्यापार केंद्र के रूप में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
हांगकांग को निर्यात में भी 18.08% की वृद्धि हुई, जो बढ़कर 2,057.02 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा, जिसे त्योहारी और अवकाश सीजन से पहले निर्माताओं और खुदरा विक्रेताओं की बढ़ती मांग ने समर्थन दिया।

नेचरल डायमंड काप्रति कैरेट औसत मूल्य 778.29 अमेरिकी डॉलरदर्ज किया गया, जो मूल्य स्थिरता और बाजार में धीरे-धीरे लौटते विश्वास को दर्शाता है।

अप्रैल–सितंबर 2025 के दौरान पॉलिश लैब-ग्रोउन डायमंड के निर्यात में 7.99% की गिरावट आई और यह घटकर 586.63 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।

इस अवधि में प्रति कैरेट निर्यात मूल्य 58.66 अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया, जो बढ़ते उत्पादन और इन्वेंटरी समायोजन के चलते वैश्विक मूल्य प्रवृत्तियों के अनुरूप रहा।

इसी अवधि में सिल्वर ज्वेलरी के निर्यात में 17.43% की वृद्धि दर्ज की गई और यह 596.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा, जबकि प्लैटिनम आभूषण निर्यात में 25.37% की बढ़ोतरी के साथ 106.54 मिलियन अमेरिकी डॉलर का स्तर प्राप्त हुआ।

कर्ल्ड जेमस्टोन के निर्यात में मामूली 0.75% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 236.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।

उद्योग त्यौहार और वेडिंग सीजन की शुरुआत के साथ सकारात्मक बने हुए हैं, क्योंकि प्रमुख बाजारों में उपभोक्ता भावना में सुधार हो रहा है और आगामी व्यापारिक सहभागिताएँ मध्य पूर्व और उससे आगे नए व्यापारिक अवसरों के द्वार खोलने की उम्मीद जता रही हैं।

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) के बारे में

रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) की स्थापना वर्ष 1966 में भारत सरकार केवाणिज्य मंत्रालयद्वारा की गई थी। यह उन कई निर्यात संवर्धन परिषदों में से एक है, जिन्हें स्वतंत्रता के बाद भारत की अर्थव्यवस्था के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश को गति देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।

1998 से, GJEPC को स्वायत्त दर्जा प्राप्त है। आज GJEPC रत्न और आभूषण उद्योग की सर्वोच्च संस्था के रूप में कार्य कर रही है और इस क्षेत्र में 10,700 से अधिक सदस्योंका प्रतिनिधित्व करती है।परिषद कामुख्यालय मुंबईमें स्थित है, जबकि इसकेक्षेत्रीय कार्यालय नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, सूरत और जयपुरमें हैं — जो सभी इस उद्योग के प्रमुख केंद्र हैं। इन कार्यालयों के माध्यम से GJEPC अपने सदस्यों के साथ सीधा और प्रभावी संवाद बनाए रखती है तथा उन्हें विभिन्न सेवाएँ प्रदान करती है।

पिछले कई दशकों में GJEPC देश की सबसे सक्रिय निर्यात संवर्धन परिषदों में से एक बन गई है। इसने निरंतर अपने प्रचार-प्रसार की गतिविधियों के दायरे और गहराई को बढ़ाया है तथा अपने सदस्यों के लिए सेवाओं की विविधता और गुणवत्ता में विस्तार किया है।

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