सूरत : ‘भूजल संरक्षण प्रबंधन एवं नीति कार्यान्वयन’ पर संवादात्मक सत्र

चैंबर ने जीपीसीबी व सीजीडब्ल्यूबी अधिकारियों को आमंत्रित किया, उद्यमियों को वर्षा जल संचयन व जल पुनर्चक्रण तकनीक अपनाने का आग्रह

सूरत :  ‘भूजल संरक्षण प्रबंधन एवं नीति कार्यान्वयन’ पर संवादात्मक सत्र

सूरत। दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा 28 अगस्त 2025, शाम 5 बजे सरसाना स्थित समहति में ‘भूजल संरक्षण प्रबंधन एवं नीति कार्यान्वयन’ विषय पर एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया।

इस अवसर पर केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) व गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) के विशेषज्ञ अधिकारियों ने उद्यमियों को भूजल संरक्षण, नीति कार्यान्वयन और जल प्रबंधन के आधुनिक उपायों की विस्तृत जानकारी दी।

सत्र में सीजीडब्ल्यूबी गुजरात के वैज्ञानिक डी. बिस्वरूप महापात्रा, सहायक जलविज्ञानी सद्दाम हुसैन, जीपीसीबी सूरत के क्षेत्रीय अधिकारी अरुण पटेल तथा जीपीसीबी अंकलेश्वर की क्षेत्रीय अधिकारी श्रीमती जिग्नाबेन ओझा उपस्थित रहे।

चैंबर अध्यक्ष निखिल मद्रासी ने कहा कि बारिश के दौरान तापी नदी से समुद्र में बहने वाला पानी इतना होता है कि उससे सूरत की 70 वर्षों की जल ज़रूरतें पूरी हो सकती हैं। ऐसे में सरकारी विभागों व सामाजिक संगठनों को मिलकर वर्षा जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

डी. बिस्वरूप महापात्रा ने उद्यमियों को चेताया कि भूजल के अंधाधुंध दोहन, वर्षा जल के अनुचित प्रबंधन और औद्योगिक गतिविधियों से जल स्तर पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने उद्योगों को वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण तकनीक अपनाने की सलाह दी और केंद्र सरकार की नीतियों व नियमों की जानकारी साझा की।

जीपीसीबी अधिकारी अरुण पटेल ने पर्यावरण और जल से जुड़े नियमों की चर्चा करते हुए बताया कि उत्सर्जन व्यापार योजना से सूरत को राष्ट्रीय पहचान मिली है और अब अपशिष्ट व्यापार योजना शुरू की जाएगी, जिससे अपशिष्ट प्रबंधन और जल संरक्षण में मदद मिलेगी।

श्रीमती जिग्नाबेन ओझा ने सचिन और पांडेसरा क्षेत्रों के उद्योगों द्वारा 115 एमएलडी उपचारित जल के उपयोग का उदाहरण देते हुए भूजल बचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में मौजूद स्वेज नदियों का पुन: उपयोग ही भविष्य की ज़रूरत है।

सद्दाम हुसैन ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के नियम, औद्योगिक परियोजनाओं की स्वीकृति, अनुपालन और दंड प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी।

सत्र के दौरान चैंबर ने श्रीमती जिग्नाबेन ओझा के उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन चैंबर की पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण एवं अपशिष्ट प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कुन्हल शाह ने किया, जबकि उप-सचिव पॉलिक देसाई ने वक्ताओं का परिचय कराया।

इस अवसर पर चैंबर के मानद मंत्री बिजल जरीवाला, विभिन्न औद्योगिक संघों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में उद्यमी मौजूद थे।

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