सूरत में कंगारू मदर केयर जागरूकता दिवस पर कार्यशाला का आयोजन, नर्सों की भूमिका को बताया अहम
कम वजन और समय से पूर्व जन्मे शिशुओं के लिए जीवनदायिनी है कंगारू मदर केयर थेरेपी: विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
सूरत : अंतर्राष्ट्रीय कंगारू मदर केयर (केएमसी) जागरूकता दिवस के अवसर पर मिशन हॉस्पिटल-अठवागेट में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का विषय था 'कंगारू मदर केयर: नर्सों की भूमिका', जिसमें नवजात शिशुओं की देखभाल में नर्सों और नियोनेटोलॉजिस्ट्स की अहम भूमिका को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन केएमसी फाउंडेशन-इंडिया, नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम (गुजरात चैप्टर), सूरत पीडियाट्रिक एसोसिएशन और एसपीएसीटी (चैरिटेबल ट्रस्ट) के संयुक्त प्रयास से किया गया।
इस अवसर पर एनएनएफ गुजरात चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. निर्मल चोरारिया ने कहा, “भारत में हर वर्ष 27 मिलियन शिशुओं का जन्म होता है, जिनमें से करीब 7.6 मिलियन बच्चे कम वजन के होते हैं। ऐसे बच्चों के लिए कंगारू मदर केयर एक प्रभावशाली चिकित्सा पद्धति है।”
उन्होंने बताया कि यह थेरेपी नवजात शिशु को उसकी मां या किसी देखभालकर्ता की छाती से लगाकर त्वचा से त्वचा के संपर्क में रखने की प्रक्रिया है, जिससे शिशु को गर्माहट, पोषण और भावनात्मक सुरक्षा मिलती है। यह प्रक्रिया कंगारू के अपने शिशु को थैली में पालने के प्राकृतिक तरीके से प्रेरित है।
डॉ. चोरारिया ने यह भी बताया कि कंगारू मदर केयर से शिशुओं का वजन, लंबाई और सिर की परिधि बेहतर रूप से बढ़ती है। इसके अलावा, यह हाइपोथर्मिया और संक्रमण के जोखिम को भी कम करती है। नियमित त्वचा-स्पर्श के माध्यम से मां और बच्चे के बीच भावनात्मक बंधन मजबूत होता है और शिशु कम रोता है।
कार्यशाला में बताया गया कि यह थेरेपी न केवल शारीरिक विकास को प्रोत्साहित करती है बल्कि अस्पताल में भर्ती समय को भी कम करती है, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ भी घटता है। डॉ. चोरारिया ने नवजात देखभाल के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, हाथ धोने और 6 माह तक केवल स्तनपान कराने की सलाह दी।
केएमसी फाउंडेशन की अध्यक्ष शशि वाणी ने जानकारी दी कि भारत में पहली कंगारू मदर केयर यूनिट 40 वर्ष पूर्व अहमदाबाद में स्थापित की गई थी। उन्होंने कहा कि माता-पिता का स्पर्श भी नवजात के लिए जीवनदायिनी सिद्ध होता है।
गुजरात नर्सिंग काउंसिल के उपाध्यक्ष इकबाल कड़ीवाला ने 30 जून को नर्सों के लिए आयोजित एक विशेष सेमिनार की घोषणा की, जिसमें नर्सों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
कार्यशाला में एसपीएसीटी के अध्यक्ष फाल्गुन शाह, सचिव डॉ. अश्विनी शाह, आईएमए सूरत के अध्यक्ष डॉ. सी.बी. पटेल, टीएंडटी वी नर्सिंग कॉलेज की प्रिंसिपल किरण डोमडिया सहित सूरत के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों की बाल रोग इकाइयों से लगभग 100 नर्स और डॉक्टरों ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य था कंगारू मदर केयर की उपयोगिता को लेकर जागरूकता बढ़ाना और नर्सों की इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका को पहचान दिलाना।
