जब मंदिर की जमीन पर उगी फसल बेचने गये पुजारी से मांगा गया देवता का आधार कार्ड!

(Photo Credit : oneindia.com)

40 बीघा जमीन की रजिस्ट्री है मंदिर के नाम पर दर्ज, कहाँ से लाये भगवान का आधार आधारकार्ड - पुजारी ने किए वैधक सवाल

वैसे तो इंसानों को अपनी पहचान दिखाने के लिए कई तरह के डोक्यूमेंट की जरूरत होती है। पर क्या भगवान को भी अपनी पहचान दिखानी पड़ती है। यदि भगवान को भी उनकी पहचान दिखानी हो तो वह कैसे दिखाएंगे। क्योंकि एक ऐसा ही मामला सामने आया है उत्तरप्रदेश के बांदा जिले से, जहां एक पुजारी ने प्रशासन पर भगवान का आधार कार्ड मांगने का आरोप लगाया है। बात हुई ऐसी की मंदिर के परिसर में उगाई गई फसल को जब बेचने के लिए पुजारी गया तो वाहन उनसे देवताओं का आधार कार्ड दिखाने कहा गया। 
विस्तृत जानकारी के अनुसार, खुरहर गांव में राम जानकी मंदिर के पुजारी को मंदिर की जमीन पर उगाए गए गेहूं को बेचने के लिए सरकारी मंडी पहुंचने के बाद एक अजीब आदेश मिला। आदेश में उन्हें कहा गया कि जिस किसी के नाम पर भी भूमि का रजिस्ट्रेशन हो उनका आधार कार्ड लेकर आए। अब 40 बीघा में फैली हुई इस जमीन का रजिस्ट्रेशन तो राम जानकी मंदिर के नाम पर है। जिसका लालनपालन मंदिर के पुजारी करते है। फसल बेच कर जो पैसे आते है, उसी की सहायता से वह पूरा साल मंदिर का खर्च निकालते है। मंदिर के पुजारी राम कुमार दास बताते है, "मैंने सरकारी मंडी में फसल बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया था। जिसे हमने मंदिर की जमीन पर उगाया था और लेखपाल के सत्यापन का इंतजार कर रहे थे। चुनाव के बाद जब मैंने पूछताछ की तो लेखपाल ने बताया कि एसडीएम ने हमारा आवेदन खारिज कर दिया है। राम कुमार दास कहते है क अब वह भगवान का आधार कार्ड कहाँ से लाये। उन्होंने जब इस बारे में जिलाधिकारी से बात की तो उन्होंने फसल को किसी कमीशन एजंट के पास बेच देने कहा। पर कमीशन एजंट के पास फसल बेचने से उन्हे काफी नुकशान हो जाएगा। 
पुजारी का कहना है की अगर वह मंडी में अपनी फसल नहीं बैच सकते तो वह अपना खर्च कैसे निकालेंगे और खाना कैसे खाएँगे। इस बारे में जब एसडीएम से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हा, उन्होंने ऐसा कहा था। फसल को बेचने के लिए आधार कार्ड जरूरी ही है, चाहे फिर वह इंसान हो या देवता। इसके अलावा खाद अधिकारी गोविंद कुमार दास ने भी कहा कि मंदिर और मस्जिदों के परिसर में उगाये गए फसल कि बिक्री वह तब ही कर सकेगे, जब उसके लिए वह ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सके। यदि सरकार इस बारे में अनुमति देती है तो वह निश्चित तौर पर ही उनकी फसल खरीदेंगे। 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें