जब 11 साल के बेटे ने मानवाधिकार आयोग से की शिकायत - 'मेरी मां से दादा-दादी को बचा लो!'

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo by Sushant Vohra on

राजस्थान के उदयपुर की घटना

कोरोना काल के दौरान राजस्थान में एक बेटे ने अपनी माता के स्वभाव के सिलसिले में मानवाधिकार आयोग को शिकायत की है। बेटे का आरोप है कि उसकी माता उसके दादा और दादी के खिलाफ अभद्र भाषा का उपयोग करती हैं। उसकी माता, दादा-दादी के साथ नहीं रहती लेकिन इसके बावजूद कभी-कभी घर पर आकर दादा-दादी को गालियां देती हैं और मानसिक अत्याचार करती हैं।
अपनी माता के गुस्सैल स्वभाव से परेशान होकर उदयपुर के अरिहंत नगर में रहने वाले पार्थ चौधरी नाम के 11 साल के बच्चे ने मानवाधिकार में शिकायत है कि माता के स्वभाव के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। इसके कारण उसकी पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। उसका कहना है कि मेरी मां मेरी दादी को डायन कहती हैं। पार्थ का कहना है कि उसके पिता और दादा-दादी ने उसे पाला है और वह सभी उसका खूब ख्याल रखते हैं। वह अपनी मां के साथ नहीं रह सकता। मेरी मां दादा दादी को इसलिए परेशान करती है ताकि उनकी संपत्ति ले सके।
11 वर्षीय पार्थ ने अपनी माता पर धमकी देने का आरोप भी लगाया है। पार्थ कहता है की उसकी माता उसकी दादी के लिए डायन और उसके लिए कलंक और कबाड़ जैसे शब्दों का प्रयोग करती है। इन सभी परेशानियों के चलते पार्थ ने माता के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने की मांग की है। पार्थ ने कहा कि मेरी मां को दादा दादी के घर नहीं आने दिया जाए। मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष रिटायर गोपालकृष्ण व्यास ने इस बारे में उदयपुर एसपी को पत्र लिखा है वह पूरी जांच करके रिपोर्ट बनाने को कहा है। फिलहाल इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

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