मरीज को हुई ब्लैक फंगस की बीमारी तो परिवार वालों ने बुलाया तांत्रिक, जानें फिर क्या हुआ

(Photo Credit : gujjurock.in)

सरकारी सहायता पर अस्पताल में इलाज करवाने की हुई थी व्यवस्था फिर भी परिवार अस्पताल से ले आया घर

देश भर में कोरोना महामारी और उसके बाद फैली हुई ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस बीमारी ने काई लोगों को अपना शिकार बनाया है। हालांकि इन गंभीर बीमारियों का इलाज करवाने के लिए आज भी देश का एक वर्फ डॉक्टरों एक अलावा तांत्रिक और भूवा -भगत पर अधिक विश्वास रखता है। हालांकि इस अंधश्रद्धा के कारण कई लोगों की जान भी चली जाती है, फिर भी वह इन तांत्रिक लोगों पर अधिक भरोसा रखते है। कुछ ऐसा ही एक किस्सा राजस्थान के बाड़मेर जिले के कल्याणपुर इलाके में से सामने आया है। जहां परिजन ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज को अस्पताल में इलाज करवाने के बदले तांत्रिक के पास ले गए। खास बात तो यह मरीज का इलाज सरकारी सहाय से की जा रही थी। 
विस्तृत जानकारी के अनुसार, सांवलाराम देवासी नाम के इस 55 वर्षीय बुजुर्ग को 26 मई के दिन आंखो में जलन होने लगी। हालांकि इसके बाड़ तबीयत अधिक बिगड़ने के कारण परिजन बुजुर्ग को बालोतरा चिकित्सालय ले गए। जहां से बुजुर्ग को ब्लैक फंगस की जांच के लिए जोधपुर रिफर कर दिया गया। जहां डॉक्टरों ने इलाज के दौरान दोनों आंखो का तेज चले जाने की और जरूरत पड़ने पर जबड़ा निकाल देने की बात भी कही। जिसके चलते परिजन बिना इलाज करवाए ही मरीज को गाँव वापिस आ गए। अस्पताल में से मरीज के चले जाने की जानकारी मिलने पर सर्वे टीम द्वारा मरीज के घर जाकर जांच की गई। 
इसके बाद स्थानिक प्रशासन और अन्य अधिकारियों ने काफी परेशानियों के बाद बुजुर्ग को वापिस इलाज के लिए अस्पताल भेजे को मनाने में सफल हुए। जिसके चलते सरकारी सहायता द्वारा 30 मई को मरीज को फिर से एम्स में दाखिल किया गया। जहां फिर से डॉक्टरों ने उन्हें मरीज की आंखे और जबड़ा निकालने की जरूरत होने की बात कही। यह बात सुनते ही मरीज के परिजन उसे फिर से अस्पताल से वापिस ले आए। हालांकि इस बार गाँव वालों ने उन्हें गाँव में नहीं घुसने दिया। जिसके चलते परिजन मरीज को खेत में बनी हुई एक वाडी में ले गए, जहां तांत्रिक को बुलाकर उसके पास विधि करवाने लगे। 
इस बारे में मरीज के पुत्र हीरराम देवासी का कहना है की यदि जबड़ा और आँख ही निकाल दी जाये तो उनकी चेहरे में कुछ बचेगा ही नहीं। ऐसे में यदि शरीर के महत्वपूर्ण अंग ही निकाल देने से अच्छा वह उन्हें घर पर ही रखकर उनका इलाज कर लेंगे। 

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें