सूरत : धोखाधड़ी से बचने के लिए सीए आकाश अग्रवाल ने कपड़ा उद्यमियों को सुझाये टिप्स, जानें

सीए आकाश अग्रवाल

अपने सप्लायर की कुछ जानकारी लेने के बाद ही उनके साथ व्यापारिक संबंध बनाना चाहिये

आज जीएसटी को लगे हुए 4 साल हो चुके हैं।  इन 4 साल में हमें बहुत कुछ नया सिखा, बहुत कुछ जाना।  अकाउंट्स एंड रिकॉर्ड्स को मेंटेन करने की अहमियत समझ आई। आप लोग अक्सर अखबार पढ़ रहे हैं कि जीएसटी में धोखाधड़ी हो रहा है, सप्लायर फर्जी पार्टी है, सप्लायर ने जीएसटी नहीं भरा आदि।
जीएसटी कानून ये बताता है कि आप जिसके साथ भी व्यापार-व्यवहार करे, उसे अच्छे से जान ले।  जीएसटी कानून आपसे ये उम्मीद रखता है कि आप अपने सप्लायर को अच्छे से जानते हुए व्यापार कर रहे हैं, ताक‌ि कल को अगर वो सप्लायर फ्रॉड करे तो आपके ऊपर भी कार्यवाही हो।
इस लिए अब हमें  अपने सप्लायर की कुछ जानकारी  लेने के बाद ही उनके साथ व्यापारिक  संबंध बनाना चाहिये।  जैसे  बैंक में खाता खोलने से पहले बैंक आपको जानते-समझते  है, आपका केवायसी (अपने ग्राहक को जानें) चैक करता है, ऐसे ही  अब हमें भी अपने सप्लायर  का केवायएस (अपने सप्लायर को जानें) चैक करना पडे़गा। केवायएस  करने का सबसे सरल उपाय जीएसटी पोर्टल है।  
बहुत केस में ऐसा भी होता है कि सप्लायर अपना जीएसटीआर-1 भर देता है जिससे आपके जीएसटीआर 2ए/2बी में उस्का विवरण दिखता हैं पर सप्लायर उतना टर्नओवर अपने जीएसटीआर 3 बी में नहीं बताता और आपसे लिया गया जीएसटी सरकार को नहीं भरता।  ऐसे केस में  भी आपको दिक्कत आ सकती है।  इसके लिए आपको जिस सप्लायर पर भी संदेह जाता है, आप उसका भरा हुआ जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर 3 बी जो जीएसटी पोर्टल से डाउनलोड होता है वो मंगवा के देख ले।  इससे  आपको ये साफ होगा कि अपना पूरा जीएसटी सरकार को भर रहा है की नहीं। यह जानकारी एसएमए के आर्थिक  टीम एडवाइजर सीए आकाश प्रेमकुमार अग्रवाल ने दी है। 
जीएसटी पोर्टल में लॉगिन कर व्यापारी को परखने के बाद ही करें व्यापार 
1-  मालिक का नाम - आप जिससे व्यापार कर रहे हैं, GSTIN उसी आदमी का है की नहीं। 2- पंजीकरण की तिथि - सप्लायर ने पंजीकरण कब से लिया, वो व्यापार कब से कर रहा है ये जान ले।  गर रजिस्ट्रेशन नया है तो पता करे कि कहीं उसका पुराना रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने कैंसिल तो नहीं किया था। 3-  GSTIN स्थिति - अभी GSTIN सक्रिय है या कैंसिल है।  अगर कैंसिल है तो आपको आइटीसी नहीं मिलेगा। 4- वार्षिक कुल कारोबार - अगर सप्लायर का टर्नओवर 5 करोड़ तक है तो सप्लायर को इनवॉइस  पे 4 अंक एचएसएन उल्लेख करना अनिवार्य है (उदाहरण: 5407)।  अगर टर्नओवर 5 करोड़ रुपये है से अधिक है तो 6 अंकों का एचएसएन अनिवार्य है (जैसे: 540708)।  चेक कर लीजिये की इनवॉइस पे कितने अंक एचएसएन उल्लेख किया है। अक्सर फ्रॉड के केस में  एचएसएन में गडबडी पाई जाती है। 5- गुड्स एंड सर्विस में डीलिंग - चेक कर ले की आपने जो गुड्स या सर्विस सप्लायर से लिया है वो एचएसएन सप्लायर ने जीएसटी पोर्टल पे उल्लेख किया हुआ है की नहीं। यदि नहीं है, सप्लायर को बोल के तुरंत चेंज करवाए। 6-  फाइलिंग टेबल दिखाएं - ये चेक कर ले की सप्लायर अपना रिटर्न टाइम पे भरा है कि नहीं।  अगर सप्लायर अपना जीएसटीआर-1  और जीएसटीआर-3 बी नहीं भरेगा तो आपको आइटीसी का क्रेडिट नहीं मिलेगा। जब सप्लायर भरेगा तो उसके बाद ही मिलेगा।
व्यापारी से समझदारी से माल बेचे तो पैसे फंसने की संभावना कम रहेगी 
सूरत मर्कन्टाइल एसोसिएशन के प्रमुख नरेन्द्र साबू ने कहा कि हाल की स्थिति को देखते हुए बहुत सावधानी पूर्वक समझदारी से व्यापार करने की जरुरत है। यदि कपड़ा व्यापारी माल बेचने से पूर्व खरीददार वाली पार्टी का जीएसटी पोर्टन की अच्छी तरह परख कर ले तो व्यापारी की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। यदि व्यापारी जीएसटी का पालन ठीक से नहीं कर रहा है तो निश्चित रुप से उससे व्यापार करने से परहेज करना चाहिए। उन्होंने सूरत के कपड़ा उद्यमियों को सुझाव देते हुए कहा कि व्यापारी समझदारी से माल बेचे तो पैसे फंसने की संभावना कम रहेगी। 

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