सूरत : इस शख्स ने बेच दिये ८ हजार नकली इंजेक्शन

(Photo Credit : news18.com)

पुलिस की छापेमारी में पकड़ी गई नकली रेमीडेसिवीर इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी, पूछताछ में सामने आए चौकने वाले खुलासे

वर्तमान में देश के सभी राज्य कोरोना की दूसरी लहर के चपेट में हैं। देश भर की स्थिति बहुत गंभीर हैं। हर गुजरते दिन के साथ कोरोना संक्रमित मामलों की स्थिति भयवह होती जा रही हैं। आलम ये हैं कि संक्रमित मरीजों को अस्पतालों में बिस्तर तक मयस्सर नहीं हैं। इससे भी बुरी बात ये हैं कि बिस्तर के अलावा दवाइयों और ऑक्सीजन की भारी कमी देखी जा रही हैं। इस कारण हर दिन मरने वालों की संख्या बढ़ रही हैं। कोरोना संक्रमण के बढ़ने के साथ ही दवाओं की कालाबाजारी भी हो रही है। गुजरात में गंभीर कोरोना रोगियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रेमेडेसिविर इंजेक्शन मिलना मुश्किल है पर कुछ लालची इंजेक्शन की कालाबाजारी कर रहे हैं। कुछ लोग मरीज के परिजनों को कीमत से तीन से चार गुना अधिक कीमत पर इंजेक्शन बेच रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ लालची प्रवृति के लोग रोगी के परिवार के सदस्यों को नकली इंजेक्शन बेचते पाए गए हैं। 4 दिन पहले एक बार फिर सूरत के ओलपाड इलाके में पिंजराट में एक फार्म हाउस में नकली रेमेडिसवीर इंजेक्शन का एक कारखाना पकड़ा गया। पुलिस ने छापेमारी के दौरान नकली इंजेक्शन बनाने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मोरबी पुलिस ने सूरत क्राइम ब्रांच की मदद से यह रेड किया था। पुलिस को छापेमारी के दौरान 60,000 रुपये के नकली इंजेक्शन मिले।
प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo : IANS)
आपको बता दें कि पुलिस ने कौशल वोरा सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपियों ने अकेले मोरबी में लगभग 5000 नकली इंजेक्शन बेचे थे और अब सूरत पुलिस को आशंका है कि इन आरोपियों ने अकेले सूरत में 8,000 से अधिक डुप्लिकेट इंजेक्शन बेचे हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी कौशल वोरा ने जयदेव सिंह ज़ला सहित चार व्यक्तियों को अहमदाबाद और मोरबी के लिए नकली इंजेक्शन बेचा था। पुलिस की जांच के बाद पुलिस को अभी भी शक है कि कई नकली इंजेक्शन अभी भी बाजार में घूम रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने लोगों से अनुरोध किया हैं कि यदि कोई भी व्यक्ति इस इंजेक्शन की काला बाजारी करता हैं या इसके लिए ज्यादा पैसे मांगता है तो लोग पुलिस को सूचित करें ताकि पुलिस अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर सके।
आपको बता दें कि पुलिस जांच में पता चला है कि पकड़े गए आरोपियों में से फाइनेंसर जयदेव वेलुभा ने पहले आठ इंजेक्शन खरीदे थे। साथ ही जयदेव ने शुरुआत में कहा कि उसने134 इंजेक्शन लेने की बात बताई। इसके बाद जब पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया तो आरोपी ने 200 इंजेक्शन खरीदने की बात कबूल की और यह भी कबूल किया कि उसने उन इंजेक्शन में से 90 इंजेक्शन वडोदरा और पंचमहल में बेच दिया। गौरतलब हैं कि कोरोना महामारी के बीच सरकार और स्वास्थ्य विभाग लोगों की जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं वहीं ऐसे असामाजिक तत्व लोगों के जीवन को खतरे में डालकर पैसे कमाने की कोशिश कर रहे हैं।

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