सूरत : 1285 करोड की लागत पर सूरत और उधना रेलवे स्टेशन का चार साल में रिडेवलप होगा

सूरत रेलवे स्टेशन

सूरत और उधना रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास से संबन्धित आयोजित प्री-बिड बैठक में 14 प्रमुख डेवलपर्स उपस्थित रहे, १२८५ करोड की लागत पर चार साल में उधन और सूरत का इस प्रकार से विकास होगा।

सूरत, उधना और उदयपुर रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास संबंधी प्री-बिड बैठक आयोजित
चौदह प्रमुख डेवलपर्स, फंड्स और कंसल्टेंट्स हुये शामिल , रेल्वे स्टेशन को एयरपोर्ट की तरह बनाने और यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाओं का होगा विकासः एस.के. लोहिया
 उदयपुर, सूरत और उधना रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास से संबन्धित  14.9.2021 को आयोजित प्री-बिड बैठक में 14 प्रमुख डेवलपर्स, फंड्स और कंसल्टेंट अर्थात अडानी, कल्पतरु ग्रुप, क्यूब कंस्ट्रक्शन, जेकेबी इंफ्रास्ट्रक्चर, जीएमआर, एमबीएल इंफ्रास्ट्रक्चर्स, मोंटे कार्लो, जीआर इंफ्रा, थॉथ इंफ्रास्ट्रक्चर, पीएसपी प्रोजेक्ट्स और वर्चुअस रिटेल साउथ एशिया प्रा. लिमिटेड, सिक्का एसोसिएट्स, एजिस इंडिया और एड्रोइट फाइनेंशियल शामिल हुये। इन तीन स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए अनिवार्य भारतीय रेलवे स्टेशन विकास निगम (IRSDC) द्वारा प्री-बिड बैठकें आयोजित की गयी थीं। पुनर्विकास का उद्देश्य एक बेहतर यात्रा अनुभव के लिए अंतर्राष्ट्रीय  हवाई अड्डे के समान अत्याधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए इन रेलवे स्टेशनों को 'रेलोपोलिस' में बदलना है।
आईआरएसडीसी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री एसके. लोहिया ने कहा,” हम सूरत, उधना और उदयपुर रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए प्री-बिड बैठकों को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया से उत्साहित हैं। स्टेशनों को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों के समान बदलने और यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए वैश्विक मानकों के अनुरूप पुनर्विकास किया जाएगा। स्टेशन पुनर्विकास बेहतर कनेक्टिविटी, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट इंटीग्रेशन और रिटेल और रियल एस्टेट को बढ़ावा देने के मामले में कई लाभ प्रदान करेगा। इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, जिससे संबंधित क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की शुरुआत होगी।
उदयपुर रेलवे स्टेशन को ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) के सिद्धांत पर डिजाइन-बिल्ड- फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBFOT) मॉडल पर पुनर्विकास किया जाएगा। विकास करने के लिए कुल क्षेत्रफल 4,98,115 वर्ग मीटर है, और स्टेशन एस्टेट विकास के लिए निर्मित क्षेत्र 1,01,374 वर्ग मीटर तक है। पुनर्विकास के लिए सांकेतिक लागत तीन साल की समय सीमा में 132 करोड़ रुपये है। छूटग्राही की अवधि 60 वर्ष है। उदयपुर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास में एक नई ईस्ट-साइड एंट्री स्टेशन बिल्डिंग की परिकल्पना की गई है, जो रेलवे अंडर-ब्रिज के माध्यम से नई ईस्ट-वेस्ट रोड कनेक्टिविटी प्रदान करती है, पैदल चलने वालों के नेटवर्क के जारिये वाणिज्यिक भूमि के माध्यम से आईएसबीटी के साथ कनेक्टिविटी और सभी प्रकार के यात्रियों के लिए आसान साइनेज प्रदान करती है। डीबीएफओटी (DBFOT) मॉडल एक परियोजना डिलीवरी पद्धति है जिसमें बुनियादी ढांचे ( इन्फ्रास्ट्रक्चर ) का डिजाइन और निर्माण, उन्हें एक विशिष्ट समय अवधि के लिए संचालित करना और विशिष्ट समय सीमा के बाद परियोजना के स्वामित्व को सरकार को हस्तांतरित करना शामिल है। 
उधना रेलवे स्टेशन
सूरत मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (एमएमटीएच) रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास एक विशेष प्रयोजन वाहन, सूरत इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईटीसीओ) द्वारा किया जाएगा, जिसे कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत आईआरएसडीसी, जीएसआरटीसी और एसएमसी के बीच रेल मंत्रालय और गुजरात सरकार के अनुमोदन के साथ एक संयुक्त उद्यम के रूप में शामिल किया गया है। विकास के लिए कुल क्षेत्रफल सूरत एमएमटीएच रेलवे स्टेशन के लिए 3,40,131 वर्ग मीटर और उधना रेलवे स्टेशन के लिए 7,38,088 वर्ग मीटर है। स्टेशन एस्टेट विकास के लिए निर्मित क्षेत्र (बीयूए) क्रमशः सूरत एमएमटीएच रेलवे स्टेशन और उधना रेलवे स्टेशन के लिए लगभग 4,65,000 वर्ग मीटर और 37,175 वर्ग मीटर है। सूरत और उधना रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास की सांकेतिक लागत चार साल की समय सीमा में 1285 करोड़ रुपये है। 
सूरत परियोजना में प्रस्तावित सुविधाओं में निर्बाध पहुंच और आवाजाही के लिए बेहतर कनेक्टिविटी और संचलन योजना, पूर्वी हिस्से को कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए एक नई ईस्ट-वेस्ट रोड, रेलवे प्लेटफॉर्म, जीएसआरटीसी टर्मिनल को निर्बाध इंटरकनेक्टिविटी प्रदान करने वाले यात्री इंटरचेंज प्लाजा के रूप में एक केंद्रीय कॉनकोर्स और वॉकवे शामिल हैं, यात्रियों के लिए बीआरटीएस/सिटी बस टर्मिनल, प्रस्तावित मेट्रो, पार्किंग जोन, मनोरंजन क्षेत्र, आसान साइनेज आदि है। 
उधना रेलवे स्टेशन
आईआरएसडीसी, सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं के एक हिस्से के रूप में प्राइवेट प्लेयर्स की भागीदारी के साथ भारत सरकार द्वारा स्टेशन पुनर्विकास परिकल्पना के एजेंडे को भी चला रहा है। इस एजेंडे के तहत 125 स्टेशनों के पुनर्विकास पर काम जारी है। इसमें से आईआरएसडीसी 63 स्टेशनों पर काम कर रहा है और रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए ) 60 स्टेशनों पर और बाकी दो स्टेशनों पर रेलवे ही काम कर रहा है। वर्तमान अनुमानों के अनुसार, रियल एस्टेट विकास के साथ-साथ 125 स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए आवश्यक कुल निवेश लगभग 50,000 करोड़ रुपये है।


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