सूरत की पहली ट्रांसवुमन को मिली मान्यता, 39 साल का 'संदीप' बना 'अलिशा'

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12 साल की उम्र से ही हुआ था महिला की तरह जीने की चाहत

पिछले काफी समय से सरकार द्वारा ट्रांसवुमन कम्यूनिटी को अपनी पहचान दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए है। इसी कड़ी में सूरत जिला कलेक्टर द्वारा सूरत के एक युवक को ट्रांसवुमन का सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। 12 साल की उम्र से ही संदीप का व्यवहार लड़कियों की तरह हो गया था। जिसके चलते लोग उसे अलग मानने लगे। डिप्लोमा की पढ़ाई करने के बाद भी संदीप मानसिक रूप से काफी परेशान था। हालांकि अंत में संदीप ने निश्चित किया की वह जैसा है वही सभी को बताएगा। जिसके चलते उसने 39 साल की उम्र में सर्जरी करवाकर खुद की पहचान बदलकर अलिशा पटेल कर ली। जिसे अब सरकार द्वारा भी मान्यता दे दी गई है। 
सूरत जिला कलेक्टर द्वारा अलिशा को एक प्रमाणपत्र दिया गया है। लिंग परिवर्तन के ऑपरेशन के बाद अलिशा को यह प्रमाणपत्र मिला था और वह सूरत में पहली ट्रांसवुमन बनी है, जिसे सरकार द्वारा मान्यता दी गई हो। अलिशा एक थेरापिस्ट है और महिला बनने के लिए अलिशा ने 8 लाख रुपए का खर्च भी किया था। अलिशा ने कहा कि 12 साल से ही उसे महिला की तरह काम करने की इच्छा होती थी। स्कूल जाते समय उसे हाफ पेंट की जगह स्कर्ट पहनकर जाना पसंद था। जिसके चलते आगे बढ़कर भी उसने इसी तरह जीने का निर्णय किया। 
साल 2019 में ट्रांसवुमन को मान्यता दिये जाने का नया नियम आने के बाद अलिशा ने सभी जरूरी डोक्यूमेंट जमा करना शुरू कर दिया था। जिसके बाद उसने सभी डोक्यूमेंट जमा सरकारी कार्यालय में जमा कर आवेदन किया था। अलिशा का कहना है कि यह प्रक्रिया काफी लंबी है। पर यदि आपका मनोबल मजबूत हो तो आप भी अपनी इच्छा व्यक्त कर सकते हो। अलिशा का कहना है कि अभी मात्र सरकारी कागजों और क़ानूनों में उन जैसी लोगों को मान्यता मिली है। पर जब वह आम पर्यावरण में अपनी जैसी महिलाओं को काम करते देखेगी तो उन्हें काफी अच्छा लगा। 

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