सूरत : नशीले पदार्थों की ऑनलाइन तस्करी, दिल्ली से ड्रग्स मंगवाकर स्थानीय स्तर पर बेचता था दंपति

ड्रग्स की फाइल तस्वीर

उच्च गुणवत्ता वाले 2 किलो हाइब्रिड गांजा, 100 ग्राम चरस और 300 से अधिक दवा की गोलियां मिलीं

दिल्ली नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने सूरत शहर एसओजी की एक टीम के साथ मिलकर ऑनलाइन एलएसडी ड्रग्स के धंधे का पर्दाफाश किया।  डार्कवेब के जरिए दिल्ली से ड्रग्स मंगवाकर स्थानीय स्तर पर ड्रग्स बेचते अडाजण के गोल वाला को गिरफ्तार किया गया है। एनसीबी की टीम ने भारी मात्रा में नशीला पदार्थ जब्त किया और दंपति को दिल्ली ले गई। गोलवाला के आलीशान फ्लैट की तलाशी में 2 किलो हाई क्वालिटी हाईब्रिड गांजा, 100 ग्राम चरस और 300 से ज्यादा नशीली गोलियां मिलीं। 
देश के युवाधन को बर्बादी के दलदल में धकेलने वाली नशीली दवाओं के नेटवर्क को खत्म करने के लिए ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स कंट्रोल सहित एजेंसियां ​​हाई अलर्ट पर हैं।   दूसरी ओर, ड्रग माफिया भी नए तौर-तरीकों के जरिए अपने नापाक इरादों को अंजाम दे रहे हैं। यह भी सामने आया कि वर्तमान डिजिटल युग में ड्रग माफिया ऑनलाइन गोरख धंधा कर रहे हैं। इस बीच दिल्ली नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो को सूचना दी गई कि डार्कवेब के जरिए ऑनलाइन ड्रग रैकेट संचालित हो रहा है। जिसके आधार पर टेक्निकल सर्विलांस पर काम कर रही एनसीबी की टीम ने खुलासा किया कि सूरत के अडाजण में एलपी सवानी रोड पर नक्षत्र अपार्टमेंट में रहने वाला कुणाल गोलवाला डार्कवेब के जरिए दिल्ली से ड्रग्स मंगवाता है और उसे सूरत में ग्राहकों को बेचता है।
दिल्ली एनसीबी की टीम ने सूरत में डेरा डाला और सूरत शहर पुलिस के एसओजी की टीम के साथ अडाजण स्थित नक्षत्र अपार्टमेंट में छापेमारी की। गोलवाला के आलीशान फ्लैट की तलाशी में 2 किलो हाई क्वालिटी हाईब्रिड गांजा, 100 ग्राम चरस और 300 से ज्यादा नशीली गोलियां मिलीं। पुलिस ने भारी मात्रा में नशीला पदार्थ बरामद किया है। कुणाल गोलवाला के साथ उनकी पत्नी दीक्षिता भी ऑनलाइन ड्रग कारोबार में संलिप्त थी। जिससे दोनों को हिरासत में लिया गया। एनसीबी ने ट्रांजिट रिमांड लिया और दंपति को लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो गये।
डार्क वेब में ऐसी वेबसाइटें हैं जो जनता को दिखाई नहीं देती 
डिजिटल दुनिया में, किसी भी सूचना का आदान-प्रदान साइबर स्पेस में होता है। साइबरस्पेस तीन प्रकार के होते हैं: सरफेस वेब, डीप वेब और डार्क वेब। जिसमें से डार्क वेब गैरकानूनी है और यहां गंदा कारोबार किया जाता है। जानकारों के मुताबिक डार्क वेब के डेटा को गूगल या किसी और सर्च इंजन में सर्च नहीं किया जा सकता है। यह वेब एक विशेष प्रकार के ब्राउज़र से डाउनलोड किया जाता है। डार्क वेब में ऐसी वेबसाइटें हैं जो जनता के लिए दृश्यमान नहीं हैं, क्योंकि वेब का आईपी पता हिडन मोड में होता है। डार्क वेब अवैध गतिविधियों जैसे मादक पदार्थों की तस्करी, पोर्नोग्राफी, बाल तस्करी, सेक्स रैकेट, आतंकवादी गतिविधि, और बहुत कुछ से भरा हुआ है। यह पता चला है कि इनमें से अधिकांश अनधिकृत गतिविधियों का बिटकॉइन के साथ कारोबार किया जाता है। डार्क वेब भी साइबर माफिया का सॉफ्ट टारगेट है। डार्क वेब पर कई समुदायों में सिल्क रोड समुदाय है, जहां मादक पदार्थों की तस्करी बड़े पैमाने पर है। साथ ही साइबर स्पेस में डार्क वेब सर्च करना भी गैरकानूनी माना जाता है।
बेटे-बहू के नशीले कारोबोर से अनभिज्ञ था परिवार 
कुणाल गोलवाला डार्कवेब से ड्रग्स मंगवा रहा था। वे सूरत में चुनिंदा ग्राहकों को मुंह मांगे मूल्य पर बेच रहा था।  वे कब से ऑनलाइन दवाएं बेच रहे हैं और उनके ग्राहक कौन थे, यह अब एनसीबी की जांच में सामने आएगा। इसके अलावा लग्जरी फ्लैट में रहने वाले कुणाल के पिता ओलपाड में करघा चलाते हैं और वेसू में बर्गर की दुकान भी है। कुणाल और उसकी पत्नी के नशे के धंधे में पकड़े जाने से सोसायटी के लोग भी चौंक उठे।
कुणाल के माता-पिता ने बताया कि कुणाल दो साल से फास्ट फूड का कारोबार कर रहा था। कुणाल देर रात दुकान बंद करके वापस आ जाते थे,जिससे  मुलाकात कम होती थी। मैं सुबह-सुबह फैक्ट्री चला जाता था। अचानक पुलिस के पहुंचने पर पता चला। 

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