सूरत : गुजरात उच्च न्यायालय ने पुलिस आयुक्त सहित 4 कांस्टेबलों पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया

प्रतिकारात्मक तस्वीर

शहर में 7 लोगों की गलत तरीके से पिटाई करने पर पुलिस के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी

कोर्ट के 3 बार समय देने के बावजूद पुलिस ने कोई जवाब नहीं दिया
गुजरात उच्च न्यायालय ने सूरत शहर के पुलिस आयुक्त सहित चार पुलिस कांस्टेबलों पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने अदालत के आदेश के बाद भी जवाब नहीं देने पर पुलिस आयुक्त और अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ा रूख अख्तियार करते हुए पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए जुर्माना लगाया है।
सूरत के सलाबतपुरा इलाके में याचिकाकर्ताओं ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने 7 लोगों को गलत तरीके से पीटा है। इस मामले में हाईकोर्ट ने पहले प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था। 6 प्रतिवादियों में से केवल 1 प्रतिवादी ने न्यायालय के आदेश के अनुसार अपना उत्तर प्रस्तुत किया। अदालत द्वारा तीन बार समय दिए जाने के बावजूद सूरत के शेष पुलिस आयुक्त सहित  पांच प्रतिवादियों ने अपना जवाब दाखिल नहीं किया। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
सूरत के सलाबतपुरा थाने के पुलिस कर्मियों ने सात लोगों को गिरफ्तार कर  पिटाई की थी। याचिकाकर्ताओं ने पुलिस के आचरण और पिटाई के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय में एक आवेदन दायर किया था। जिसमें एक व्यक्ति ने बुरी तरह पीटे जाने का दावा किया है। जिससे डीके बासु बनाम बंगाल राज्य के 1997 के मामले के आदार पर सुप्रीम कोर्ट ने किसी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद किस तरह की कार्रवाई की जानी चाहिए, इस संदर्भ में गाइड लाइन जारी किया था। जिसके अनुसार आवेदकों के साथ व्यवहार नहीं किया गया।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें