सूरत : हीरा उद्योग में तेजी, हीरा श्रमिकों की मजदूरी में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि

कारीगरों को 30 हजार से ज्यादा वेतन देना तय

कोरोना संक्रमण घटने के बाद पिछले पांच दशकों में हीरा श्रमिकों के वेतन में इस वर्ष 2021 में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। हीरा श्रमिकों के वेतन में 5 हजार से लेकर 10 हजार तक बढ़ोतरी हुई है। हालांकि यह भी सच है कि काम में लापरवाही या आलस करने वालों के वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। जैसे-जैसे हीरा उद्योग में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ता गया, अधिकांश उद्योगपतियों ने फैसला किया कि अगर उन्हें प्रौद्योगिकी की ओर बढऩा है, तो उन्हें कारीगरों को पूरा मुआवजा देना होगा। कतारगाम क्षेत्र में मेन्युफेक्चरिंग इकाई के मालिक ने कहा कि अगर कारीगरों को बनाए रखना है, तो उनका वेतनमान बढ़ाना होगा।
यदि कारोबार को सुचारू रूप से चलाना है, तो हीरा श्रमिकों के बिना चलाना संभव नहीं है। हीरा श्रमिकों के बिना कारोबार कैसे किया जा सकता है? और इसलिए यदि बड़े उद्यमियों को कारीगरों को  30 हजार से ज्यादा वेतन देना  तय हुआ। क्योंकि अब कोई हीरा श्रमिक 20-25 हजार की तनख्वाह लेकर सूरत में नहीं रह सकता।
हीरा इकाई में काम करने वाले हीरा श्रमिक का औसत वेतन रुलगभग 30 हजार रूपए होता है। हालांकि, कई श्रमिक 60 हजार या 15 हजार रूपए भी कमाते है। कम वेतन कमाने के पीछे कारण  समय-समय पर चाय पीने के लिए फैक्ट्री से बाहर जाना या काम के घंटों के दौरान मोबाइल पकड़े बैठे रहना और सुबह जल्दी फैक्ट्री न आना है।

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