सूरत : जीएसटी दर को लेकर चैंबर ने टेक्सटाइल उद्योगपतियों और व्यापारियों के साथ की बैठक

चैम्बर की बैठक में उपस्थित कपडा उद्योग से जुडे व्यापारी, उद्योगपति

जनवरी २०२२ से कपडा उद्योग में जीएसटी की दरों को लेकर चेम्बर ऑफ कोमर्स ने कपडा व्यापारी और उद्योगपतियों के साथ बैठक कर राय जानने का प्रयास किया

जीएसटी दर में बदलाव न करने पर ज्यादातर उद्योगपतियों की राय , मालेगांव, भिवंडी और इचलकरंजी के कपड़ा अग्रणी भी ऑनलाइन शामिल हुए
जीएसटी काउंसिल की हाल में ही हुई बैठक में केंद्र सरकार ने  जनवरी 2022 से टेक्सटाइल क्षेत्र से इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को हटाने का फैसला किया है। टेक्सटाइल क्षेत्र पर होने वाले असर और इस संदर्भ में वित्त मंत्री से कया मांग करें इसको लेकर ध सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की सूरत में वीवर्स, प्रोसेसर , कपड़ा उद्योगपतियों और कपड़ा व्यापारियों के साथ एक ऑफ़लाइन और ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई थी। 
बैठक में चैंबर के अध्यक्ष आशीष गुजराती, उपाध्यक्ष हिमांशु बोडावाल, फियास्वी अध्यक्ष भरत गांधी, फोगवा अध्यक्ष अशोक जीरावाला, वीवर्स अग्रणी मयूर गोलवाला, प्रोसेसर अग्रणी रवींद्र आर्या, साउथ गुजरात वार्प निटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेश गोंडलिया, नेरो फेब्रिक्स एसोसिएशन से राजेंद्र लालवाला, केतन जरीवाला, दीपप्रकाश अग्रवाल, फोस्टा से चंपालाल बोथरा, भिवंडी वीवर्स अग्रणी हिरेन नागडा, पुनीत खीमशा, मालेगांव पावर लूम्स एसोसिएशन से साजिद और इचलकरंजी से श्यामसुंदर और अशोक बहेती उपस्थित थे। 
टेक्सटाइल क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों के अधिकांश अग्रणियों का विचार था कि मौजूदा जीएसटी कर ढांचे में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा ढांचे से रिफंड मिलता है और उद्योगपतियों को रिफंड मिलने में कोई दिक्कत नहीं है। जो रिफंड मिलता है उसे फिर से उद्योग में ही रिइन्वेस्ट किया जाता है। जिसके कारण वीविंग केपेसिटी लगातार बढ़ रही है।
अशोक जीरावाला ने कहा कि वीविंग क्षेत्र में भुगतान की शर्तें छह महीने हैं। इसके अलावा, जब पार्टी पलायन के मामले होते हैं तो वीवर्स का पैसा डूब जाता है। यदि ऐसी परिस्थितियों में इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर हटाया जाएगा, तो वीविंग को अपने रूपये डालकर चुकाना पड़ेगा। जीएसटी कर ढांचे में बदलाव से वीवर्स उद्योग धराशायी हो जाएगा। भिवंडी, मालेगांव, उधना उद्योगनगर, इच्छकरंजी सहित सभी वीवर्स के अग्रणियों का एक ही सूर था कि जीएसटी कर ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
बृजेश गोंडालिया ने कहा कि इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को बदलना है तो टेक्सटाइल इंडस्ट्री की पूरी श्रृंखला का ढांचा सिर्फ 5 फीसदी होना चाहिए। फोस्टा के चम्पालाल बोथरा ने कहा कि विशेष रूप से व्यापार और खुदरा बिक्री कपड़ा उद्योग में सबसे अधिक रोजगार प्रदान करती है। अगर जीएसटी कर ढांचे में बदलाव किया गया तो अंतिम उपभोक्ता के लिए कपड़े और महंगे हो जाएंगे और छोटे व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होगा। व्यापारियों की बिक्री घटेगी और पूरा कपड़ा उद्योग धराशायी हो जाएगा। सरकार को कर की दर निर्धारित करनी चाहिए ताकि उपभोक्ता को वस्तु सस्ती मिल सके।
प्रोसेसर्स अग्रणी रवींद्र आर्या ने कहा कि हाल में इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के कारण केपिटल गुड्स पर जीएसटी वसूल नहीं किया जा सकता है। इस वजह से भारत वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी नहीं हो सकता है। इसलिए इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को हटाया जाना चाहिए। ताकि केपिटल गुड्स पर लगने वाले जीएसटी की रिकवरी हो सके। बैठक के अंत में चैंबर के अध्यक्ष आशीष गुजराती ने कहा कि इस मुद्दे पर दो दिनों में फिर से चर्चा की जाएगी और फिर अंतिम पेशकश तैयार की जाएगी। चैंबर के उपाध्यक्ष हिमांशु बोडावाला ने सभी को धन्यवाद दिया और बैठक का समापन किया

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