सूरत : चैंबर ऑफ कॉमर्स ने GST में फेसलेस असेसमेंट और अपील प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव दिया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपा विस्तृत प्रेजेंटेशन, MSME सेक्टर को बड़ी राहत की उम्मीद

सूरत : चैंबर ऑफ कॉमर्स ने GST में फेसलेस असेसमेंट और अपील प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव दिया

सूरत। सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के अंतर्गत फेसलेस असेसमेंट, फेसलेस एडजुडिकेशन और फेसलेस अपील मैकेनिज्म लागू करने के संबंध में भारत की माननीय केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को एक विस्तृत प्रेजेंटेशन सौंपा है।

चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट निखिल मद्रासी ने बताया कि प्रेजेंटेशन के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री को अवगत कराया गया कि इनकम टैक्स में लागू की गई फेसलेस असेसमेंट और फेसलेस अपील स्कीम एक ऐतिहासिक और सफल सुधार साबित हुई है। इससे टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ी है, व्यक्तिगत संपर्क समाप्त होने से निर्णय प्रक्रिया में एकरूपता आई है और टैक्सपेयर्स का भरोसा मजबूत हुआ है।

उन्होंने कहा कि GST सिस्टम पहले से ही काफी हद तक डिजिटल है, जिसमें रिटर्न फाइलिंग, ई-इनवॉइस, ई-वे बिल, रिफंड क्लेम और विभिन्न एप्लीकेशन पूरी तरह ऑनलाइन हैं। ऐसे में GST के तहत असेसमेंट, एडजुडिकेशन और ऑडिट की प्रक्रिया को भी फेसलेस बनाना समय की आवश्यकता है।

चैंबर ने यह भी सुझाव दिया कि वर्तमान में लागू ई-स्कीम को पूरी तरह फेसलेस में बदला जाए, क्योंकि अभी ऑनलाइन प्रक्रिया के बावजूद व्यापारियों और प्रोफेशनल्स को दस्तावेज जमा करने के लिए भौतिक रूप से GST कार्यालय जाना पड़ता है। इससे ई-स्कीम का मूल उद्देश्य प्रभावित होता है।

प्रेजेंटेशन में बताया गया कि फिलहाल GST के अंतर्गत असेसमेंट और प्रोसिडिंग्स जूरिस्डिक्शनल अधिकारियों द्वारा फिजिकली की जाती हैं, जिससे अलग-अलग व्याख्याएं, अतिरिक्त लागत और अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं। यह प्रक्रिया खासकर माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए जटिल और महंगी साबित हो रही है।

चैंबर ने सुझाव दिया कि फेसलेस असेसमेंट को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए, जिसमें रिटर्न स्क्रूटनी, GSTR-1 और GSTR-3B के मिसमैच नोटिस, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े मामले, CGST एक्ट की धारा 73 और 74 के तहत कारण बताओ नोटिस, रिफंड वेरिफिकेशन और ऑडिट प्रोसीजर शामिल किए जा सकते हैं। इसके लिए इनकम टैक्स की तर्ज पर नेशनल फेसलेस GST सेंटर जैसे सेंट्रल डिजिटल प्लेटफॉर्म की सिफारिश की गई है।

चैंबर ने GST के तहत फेसलेस अपील सिस्टम लागू करने की भी मांग की है। वर्तमान में GST अपीलेट ट्रिब्यूनल (GSTAT) पूरी तरह कार्यरत नहीं होने के कारण अपील मामलों में भारी पेंडेंसी है। यदि कमिश्नर (अपील) स्तर पर फेसलेस अपील मैकेनिज्म लागू किया जाता है, तो त्वरित और पारदर्शी न्याय सुनिश्चित हो सकेगा।

चैंबर ने यह भी कहा कि स्टेट GST (SGST) अधिकारियों को इस फेसलेस सिस्टम में पूरी तरह इंटीग्रेट किया जाना चाहिए, ताकि सेंट्रल और स्टेट दोनों स्तरों पर एक समान, निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया लागू हो सके। इससे कोऑपरेटिव फेडरलिज्म की भावना भी मजबूत होगी।

चैंबर ऑफ कॉमर्स का मानना है कि GST में फेसलेस असेसमेंट और फेसलेस अपील सिस्टम लागू करना एक फ्यूचर-ओरिएंटेड और टैक्सपेयर-फ्रेंडली सुधार होगा, जो “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस” के विजन को साकार करेगा। इससे न केवल पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा, बल्कि भारत को ग्लोबल लेवल पर डिजिटल टैक्स गवर्नेंस का एक मजबूत मॉडल बनाने में भी मदद मिलेगी।

अंत में, चैंबर ने केंद्रीय वित्त मंत्री से इस सुधार के लिए आवश्यक पॉलिसी निर्णय, विधायी संशोधन और टेक्नोलॉजिकल रोडमैप को शीघ्र लागू करने का अनुरोध किया है।