बार-बार एक ही मास्क का प्रयोग भी है म्यूकोमाइकोसिस का एक कारण

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo : IANS)

महामारी का रूप ले चुकी हैं म्यूकोमाइकोसिस, देशभर में नौ हजार जितने मरीज, सबसे अधिक गुजरात में

एक ओर जहाँ धीरे-धीरे कोरोना संक्रमण के कम होने और काबू में आने से देश ने थोड़ी राहत की साँस की वहीं कोरोना के बाद ब्लैक फंगस या म्यूकोमाइकोसिस ने देश भर के डॉक्टर्स और प्रशासन की नींद उडा रखी हैं। एक और देश कोरोना महामारी से उबर भी नहीं था कि इस नई आफत ने लोगों की जान मुसीबत में डाल रखी हैं। अब ब्लैक फंगस यानी म्यूकोमाइकोसिस महामारी अपने चरम पर है। केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में लगभग 9 हजार लोग ब्लैक फंगस की चपेट में आ चुके हैं। वर्तमान में देश के 14 राज्यों ने मुकोरमायकोसीस को महामारी घोषित कर दिया है। शनिवार को उत्तराखंड, बिहार और मध्य प्रदेश ने भी मुकोरमायकोसीस को महामारी घोषित कर दिया।
आपको बता दें कि म्यूकोमाइकोसिस के सबसे ज्यादा मामले गुजरात में सामने आए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गुजरात में म्यूकोमाइकोसिस के सबसे ज्यादा 2 हजार 281 मामले दर्ज किए गए हैं जबकि 5 हजार से ज्यादा अनाधिकारिक मामले हैं। गुजरात के बाद दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र है। महाराष्ट्र में अब तक 2,000 मामले सरकारी किताबों में दर्ज हो चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि अगर स्टेरॉयड का इस्तेमाल अंधाधुंध बंद कर दिया जाए तो म्यूकोमाइकोसिस के मामले को रोका जा सकता है। नीति आयोग के सदस्य डॉ वी पॉल ने कहा, "हमें म्यूकोमाइकोसिस से लड़ना है। यह बीमारी अब एक महामारी बन चुकी है।" आगे उन्होंने कहा कि “कोरोना को मात देने के लिए उपयोग में ली जाने वाली स्टेरॉयड दवाओं के अति प्रयोग से म्यूकोमाइकोसिस जैसी महामारी हो सकती है।”
एम्स में न्यूरोसर्जरी के प्रोफेसर डॉ शरत चंद्र ने कहा कि कोरोना वायरस के मरीज को सीधे ठंडी ऑक्सीजन देना खतरनाक है। उन्होंने यह भी कहा कि एक ही मास्क को दो से तीन सप्ताह तक इस्तेमाल करने से भी ब्लैक फंगस या म्यूकोमाइकोसिस का खतरा बढ़ जाता है। म्यूकोमाइकोसिस की घटनाओं को कम करने के लिए रोगियों को पोसाकोनाज़ोलनामक एंटीफंगल दवा दी जा सकती है। फंगल इंफेक्शन कोई नई बात नहीं है लेकिन ये कभी भी महामारी के रूप में इस तरह इतने बड़े स्तर पर सामने नहीं आई हैं। आगे उन्होंने कहा कि फंगल संक्रमण महामारी तक पहुंचने का सबसे बड़ा कारण अनियंत्रित मधुमेह और टॉक्सिलिज़ुमाब के साथ स्टेरॉयड का उपयोग करना रहा हैं। ऑक्सीजन सपोर्ट वाले मरीजों को म्यूकोमाइकोसिस का अधिक खतरा है। कोरोना से ठीक होने के छह सप्ताह तक में ऐसे लक्षण होने पर म्यूकोमाइकोसिस का का खतरा बढ़ जाता है।

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