प्रधानमंत्री ने लिया बड़ा फैसला, अब से मेजर ध्यानचंद के नाम से जाना जायेगा खेल रत्न पुरस्कार

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भारतीय हॉकी टीमों के टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के बाद इस सम्मान का नाम महान हॉकी खिलाड़ी के नाम पर रखने का फैसला लिया गया

आज प्रधानमंत्री मोदी ने एक बड़ी घोषणा की। इस घोषणा के बाद अब से भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न पुरस्कार का नाम राजीव गांधी खेल रत्न नहीं बल्कि मेजर ध्यानचंद खेल रत्न होगा। भारतीय हॉकी टीमों के टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के बाद इस सम्मान का नाम महान हॉकी खिलाड़ी के नाम पर रखने का फैसला लिया गया। यह जानकारी स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी। प्रधानमंत्री ने बताया कि बहुत से लोग उन्हें इसके लिए संदेश भेज रहे है कि खेल रत्न पुरस्कार मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखा जाना चाहिए। ऐसे में लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए ये फैसला लिया गया और अब से खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के रूप में जाना जाएगा।
आपको बता दें कि लंबे समय से भारत रत्न के हक़दार के रूप में देखे जा रहे हॉकी के जादूगर के मेजर ध्यानचंद ने हॉकी में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 प्रयागराज में हुआ था। हॉकी खेलने वाले दूसरे देश ध्यानचंद को विजार्ड और मैजिशियन जैसी संज्ञा देते हैं। उन्होंने अपने अंतिम ओलंपिक (बर्लिन 1936) में 13 गोल किए। इस प्रकार ध्यानचंद ने एम्स्टर्डम, लॉस एंजिल्स और बर्लिन ओलंपिक में संयुक्त रूप से 39 गोल किए।
वहीं खेल रत्न पुरस्कार की बात करें तो देश में खेल रत्न पुरस्कार की शुरुआत 1991-92 में राजीव गांधी के नाम पर हुई थी। पहला खेल रत्न पुरस्कार भारतीय ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद को दिया गया था। अब तक 45 खिलाड़ी इस पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं। हाल में क्रिकेटर रोहित शर्मा, पैरालंपियन हाई जम्पर मरियप्पन थंगवेलु, टेबल टेनिस प्लेयर मनिका बत्रा, रेसलर विनेश फोगाट को यह पुरस्कार दिया गया है। इस पुरस्कार के तहत खिलाड़ी एक प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो और 25 लाख रुपए की राशि दी जाती है।

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