मोदी सरकार ने उठाया बड़ा कदम , भारत विरोधी खबर देने और पाकिस्तानी महिमामंडन करने वाले यूट्यूब चैनलों को किया बंद

(Photo Credit :gujarati.news18.com)

फेक न्यूज के खिलाफ केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई, 35 लाख से अधिक सब्सक्राइबर्स वाले चैनल को किया बंद

वर्तमान भारत सरकार अपने दुश्मनों को काबू में रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। पहले भारत ने चीन को झटका देते हुए उनके बहुत से एप को प्रतिबंधित कर दिया था और अब इसी क्रम में बड़ा कदम उठाया। दरअसल पाकिस्तान के झूठ फैलाने के प्रोपेगेंडा पर भारत सरकार ने कड़ा प्रहार करते हुए 20 यू-ट्यूब चैनल और दो वेबसाइट्स को बंद कर दिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान की मदद से चल रहे फेक न्यूज नेटवर्क को ब्लॉक कर दिया है।
आपको बता दें कि यू-ट्यूब पर 20 चैनल और 2 वेबसाइट्स पर फेक समाचार के जरिए भारत को नुकसान पहुँचाने के लिए ब्लॉक कर दिया। केंद्र सरकार की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक खुफिया एजेंसियों और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को आदेश जारी किया। इस आदेश के अनुसार बंद किये गए चैनल और वेबसाइट्स पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे थे और कई संवेदनशील मुद्दों पर गलत जानकारी फैला रहे थे। ये चैनल कश्मीर, सेना, भारत में रहने वाले अल्पसंख्यकों, राम मंदिर और दिवंगत जनरल बिपिन रावत को लेकर भड़काऊ और बांटने वाली गलत जानकारी फैला रहे थे। मंत्रालय ने पाया कि अधिकतर सामग्री राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील है और तथ्यात्मक रूप से गलत है. भारत विरोधी यह सामग्री पाकिस्तान की ओर से पोस्ट की जा रही थी. इस वजह से यह इमरजेंसी स्थिति में ब्लॉक करने के प्रावधान की शर्त को पूरा करती है.
आपको बता दें कि भारत के खिलाफ गलत खबर फैलाने के कारण बंद किये गए चैनल में पाकिस्तान से ऑपरेट होने वाला ‘द नया पाकिस्तान ग्रुप’ (NPG) शामिल है। इन चैनल्स के कुल मिलाकर सबस्क्राइबर 35 लाख से ऊपर हैं और इनके वीडियो 55 करोड़ से ज्यादा बार देखे जा चुके थे। इसके अलावा नया पाकिस्तान ग्रुप की फेक न्यूज में कई बार पाकिस्तानी न्यूज चैनल्स के एंकर भी दिखाई दिए हैं।
गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा बंद किया गया ये यू-ट्यूब चैनल किसान आंदोलन, नागरिकता अधिनियम जैसे मुद्दों में भी आग में घी डालने का काम कर रहे थे। ये चैनल्स देश के अल्पसंख्यकों को भारत सरकार के खिलाफ भड़का रहे थे. यह भी आशंका थी कि ये चैनल्स पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा बनना चाहते थे। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भारत के सूचना क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए IT रूल्स 2021 के 16 नंबर नियम का इस्तेमाल किया।

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