जानिए कौन सा देश बसा रहा हैं समुद्र पर एक नया शहर

(Photo : aajtak.in)

डेनिश सरकार ने माना इसे देश के इतिहास की सबसे बड़ी निर्माण परियोजनाओं में से एक

दुबई में कुछ साल पहले एक कृत्रिम शहर बसाया गया था जिसकी खासियत ये थी कि वो पूरा शहर समुन्द्र पर बना हुआ था। इसे कुशल अभियंताओं ने अपनी कुश कारीगिरी के सहारे बनाया था। हाल ही में डेनमार्क द्वारा फिर एक बार ऐसा ही किया जा रहा हैं। दरअसल डेनमार्क समुद्र में मिट्टी डालकर एक शहर बनाने जा रहा है। बड़ी बात ये हैं कि देश की संसद ने भी इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस नए शहर में लगभग 35,000 लोग रहेंगे। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक लोगों को यहां एक आधुनिक शहर के तौर पर सारी सुविधाएं मिलेंगी। कोपेनहेगन बंदरगाह को बढ़ते समुद्र के स्तर से बचाने के लिए इस कृत्रिम द्वीप को बनाया जा रहा है। लिनेथोम नामक यह विशाल द्वीप एक रिंग रोड, एक सुरंग और एक मेट्रो लाइन द्वारा डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन से जुड़ा होगा।
आपको बता दें कि इस कृत्रिम द्वीप का आकार एक वर्ग मील यानि 2.6 वर्ग किलोमीटर होगा। सब कुछ ठीक रहा तो इस साल के अंत तक इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। हालांकि समुद्र में शुरू होने वाले इस प्रोजेक्ट को लेकर अलग-अलग पर्यावरणविदों का बयान अलग है। अधिकांश पर्यावरणविद द्वीप के निर्माण को लेकर चिंतित हैं। ऐसी आशंका लगाई जा रही है कि इस प्रोजेक्ट को जनविरोध का भी सामना करना पड़ सकता है। कुछ पर्यावरण समूहों ने द्वीप के निर्माण के खिलाफ यूरोपीय न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की है। उनका मानना है कि अगर परियोजना पर काम शुरू होता है, तो कच्चे माल से लदे 350 ट्रक कोपेनहेगन से गुजरेंगे, जिससे न केवल शहर की सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ेगी बल्कि प्रदूषण भी बढ़ेगा।
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साथ ही ये निश्चित किया गया हैं कि बंदरगाह को बढ़ते समुद्र के स्तर और तूफान से बचाने के लिए डेनमार्क में बनाए जा रहे नए द्वीप के चारों ओर एक बांध बनाया जाएगा। ऐसे में यदि ये परियोजना समय पर शुरू होती है, तो अधिकांश काम 2035 तक पूरा हो जाएगा। हालांकि इस काम के 2070 तक पूरा होने की उम्मीद है। 
स्थानीय मीडिया की माने तो इस द्वीप का आकार लगभग 400 फुटबॉल मैदानों के आकार के बराबर होगा। जिसके लिए करीब 80 मिलियन टन मिट्टी की जरूरत होगी। पर्यावरणविदों का मानना है कि द्वीप के बनने से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने के साथ साथ समुद्री पारिस्थितिक तंत्र और पानी की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। डेनमार्क के डेनिश ब्रॉडकास्टर डीआर के अनुसार, शुक्रवार को कोपेनहेगन में प्रतिनिधि सभा के बाहर प्रदर्शनकारी विधायिका के पक्ष में 85 मतों और विपक्ष में 12 मतों से हारने के बाद एकत्र हुए, उन्होंने चिंता व्यक्त की कि द्वीप के निर्माण से भारी ट्रक कोपेनहेगन से गुजरेंगे और प्रदूषण बढ़ेगा स्तर।
डेनिश सरकार के अनुसार, यह देश के इतिहास में सबसे बड़ी निर्माण परियोजनाओं में से एक है। डेनमार्क रोड ट्रांसपोर्ट ऑफ गुड्स की अध्यक्ष कैरिना क्रिस्टेंसन ने बताया कि पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचाए बिना भी माल परिवहनकिए जा सकते हैं। इसके कई उपाय है पर ये अधिक खर्चीले है और इसके लिए सरकारी अधिकारियों के अनुमोदन की आवश्यकता होगी।

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