क्या पत्नी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाना भी दुष्कर्म? जानिए क्या है कानून और क्या है सुप्रीम कोर्ट की राय

(File Photo: IANS)

सुप्रीम कोर्ट इस बात की समीक्षा करेगा कि क्या पत्नी अपने पति के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कर सकती है।!

एक पत्नी द्वारा पति पर वैवाहिक बलात्कार के मामले को रद्द नहीं करने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अब सुप्रीम कोर्ट इस बात की समीक्षा करेगा कि क्या पत्नी अपने पति के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कर सकती है। यानी क्या पति को अपनी पत्नी पर जबरदस्ती करने का अधिकार है? मौजूदा कानून के तहत पत्नी अपने पति पर रेप का मुकदमा नहीं कर सकती है। एक पुरुष को अपनी मर्जी से अपनी पत्नी के साथ संबंध बनाने करने का अधिकार है। इस नियम के अनुसार वैवाहिक बलात्कार कोई अपराध नहीं है। कई महिला संगठन सालों से इसे अपराध की श्रेणी में लाने की मांग कर रहे हैं। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नोटिस जारी कर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई को तय की गई है। दरअसल कर्नाटक में एक शादीशुदा शख्स पर उसकी पत्नी ने रेप का आरोप लगाया था, जिस पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।
बता दें कि शिकायत करने वाली महिला के पति ने निचली अदालत के फैसले को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने आरोपी को अपने खिलाफ दर्ज रेप केस का सामना करने का भी निर्देश दिया है।पति ने इस मामले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है। पति ने अपनी अर्जी में कहा है कि कानून के मुताबिक उस पर रेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता। इसलिए निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक नहीं लगाई, लेकिन याचिकाकर्ता से निचली अदालत को सूचित करने को कहा कि इस मामले की सुनवाई अब शीर्ष अदालत कर रही है। सुप्रीम कोर्ट अब कानून की समीक्षा करेगा।
यह उल्लेख करना उचित है कि मौजूदा वैवाहिक कानून में, यदि पति अपनी पत्नी की इच्छा के विरुद्ध अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध रखता है तो इसे बलात्कार नहीं माना जाता है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट इस कानून की समीक्षा करने के लिए तैयार है।

(यौन उत्पीड़न के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पीड़िता की निजता का सम्मान करते हुए उनकी पहचान उजागर नहीं की गई है।)

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें