प्रेरणादायक : बायोकेमिस्ट्री के प्रोफेसर डॉ. चौपाल डेबनाथ ने किया चौथी बार प्लाज्मा दान

जरुरत पड़ी तो आगे भी करेंगे दान

कोरोना महामारी  के दौरान सूरत के नागरिक राज्य भर में प्लाज्मा दान में सबसे आगे रहे। प्लाज्मा कोरोना को हराने का प्रमुख अंग होने के कारन सूरत के लोग बड़ी संख्या में आगे आकर प्ल्ज्मा दान क्र रहे है। ऐसे में 33 वर्षीय डॉ चौपाल डेबनाथ ने चार बार प्लाज्मा दान करके अपनी सामाजिक जिम्मेदारी पूरी की। वर्तमान स्थिति में, कोरोना रोग की गंभीरता को कम करने में प्लाज्मा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में डॉ चौपाल ने कहा कि वह कोरोना महामारी में अधिक से अधिक प्लाज्मा दान करके जरुरतमंद लोगों की सेवा करना जारी रखेंगे।
आपको बता दें कि मूल रूप से त्रिपुरा के अगरतला के रहने वाले और अब सिविल अस्पताल के क्वार्टर में रह रहे जैव रसायन विभाग के निवासी प्रोफेसर डॉ चौपाल डेबनाथ ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले जुलाई में, कोविड के पहले चरण में, उन्हें सामान्य बुखार, सर्दी खांसी और शारीरिक कमजोरी का पता चला था, इसलिए उन्होंने साथी डॉक्टर की सलाह के अनुसार कोविड एंटीजन टेस्ट और आरटी-पीसीआर की रिपोर्ट की, जो दोनों नकारात्मक रही। लेकिन शरीर की कमजोरी के कारण एचआर-सीटी स्कैन ने 10 प्रतिशत कोरोना प्रभाव दिखा। इसके बाद छात्रावास में उपचार से उबरने के बाद मेरे शरीर में एंटीबॉडी बन गया है ऐसे में मैं प्लाज्मा देने के लिए तैयार हूं। उन्होंने उन सभी लोगों से प्लाज्मा दान करने की अपील कीजिन्हें कोरोना संक्रमण था और अब उनके ठीक होने के बाद उनके शरीर में एंटीबॉडी बन रहे हैं। 
कोरोना की दुसरी लहर को देखते हुए टीके के साथ साथ प्लाजा की मांग बढ़ गई है। ऐसे में डॉ चौपाल ने कहा कि कोरोना महामारी में प्लाज्मा एक कारगर हथियार साबित हुआ है। जिसने उन्होंने तेजी से उबरने के कारन प्लाज्मा दान करने का फैसला किया। उन्होंने सितंबर में पहली बार प्लाजा दान दिया। तब से हर 45 दिनों में प्लाजा को दान दिया है और अब तक चौथी बार प्लाज्मा दान कर चुके है और आगे भी जब तक जरूरत पड़ेगी वो प्लाजा दान करते रहेगे, ऐसा उन्होंने फैसला किया है। उन्होंने कहा की यदि प्लाज्मा दान करने से दो मरीजों की जान बचाई जा सकती है, तो इससे बड़ी सेवा और क्या हो सकती है?
कोरोना को हराने के लिए जिस तरह से लोग प्लाज्मा दान करने के लिए आगे आ रहे है वो  वास्तव में प्रेरणादायक है। ऐसे कोरोना योद्धाओं के द्वारा कोरोना महामारी को हराने में निश्चित सफलता मिलेगी। वर्तमान में कोविड के मामले में जीवन रक्षक वैक्सीन  45 वर्ष से अधिक आयु के सभी को दिया जाना चाहिए। हमारी छोटी सी समझ समाज में कई लोगों के जीवन को बचाएगी।

नए सिविल ब्लड बैंक के डॉ मयूर जरग ने कहा कि ऐसे समय में जब कोरोना का दूसरा चरण गंभीर है, ऐसे में अधिक से अधिक  लोगों को प्लाज्मा दान करने की आवश्यकता है। 28 दिन पहले कोविड से ठीक होने वालों के अलावा, जिन लोगों को टीका लगाया गया है, वे 30 दिन बाद प्लाज्मा दान कर सकते हैं।

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