दिवाली के पहले ही आम आदमी के सर पर फूटा महंगाई का बम, LPG सिलिंडर से लेकर सब्जी-चीनी सभी की कीमतों में इजाफा

प्रतिकात्मक तस्वीर

सूखे और कोरोना वायरस के कारण दुनिया भर में चीनी उत्पादक देशों के उत्पादन पर पड़ी है भारी असर

त्योहारी सीजन से पहले पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ कई आइटम और महंगे हो गए हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतें हर दिन रिकॉर्ड बना रही हैं। एक रसोई गैस सिलेंडर की कीमत भी हजार रुपए को छूने लगी है और अब सब्जियों और दालों के दाम भी बढ़ गए हैं। सरसों तेल के दाम 200 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। टमाटर की कीमतें 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं और चीनी की कीमतें भी बढ़ रही हैं। पेट्रोलियम कंपनियों ने द्वारा 6 अक्टूबर से एलपीजी सिलेंडर में 15 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। बढ़ोतरी के बाद दिल्ली और मुंबई में बिना सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 899.50 रुपये हो गई है। 5 किलो के सिलेंडर की कीमत 502 रुपये हो गई है। पटना में एलपीजी सिलेंडर के लिए लोगों को 998 रुपये चुकाने होंगे। इसके पहले 1 अक्टूबर को 19 किलो के रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी की गई थी।  Azamgarh Vegetable Oil Cost Inflation Increased Poor Worried - सब्जियों की  कीमतों में भारी इजाफा, हरे मिर्च की कीमत सुनेंगे तो रह जाएंगे दंग | Patrika  News
दुनिया के कई देशों में ऊर्जा संकट बढ़ता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सिलसिला जारी है. सरकारी तेल कंपनियों ने आज एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। बुधवार को दिल्ली के बाजार में इंडियन ऑयल पंप पर पेट्रोल की कीमत 102.94 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 91.72 रुपये प्रति लीटर हो गई। भोपाल में डीजल की कीमत 100.42 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत 111.45 रुपये प्रति लीटर है। पिछले आठ दिनों में पेट्रोल की कीमत 1.75 रुपये प्रति लीटर हो गई है। जबकि डीजल 11 दिनों में 2.80 रुपये चढ़ा है। त्योहारी सीजन से पहले टमाटर की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। कुछ हफ्ते पहले टमाटर की कीमत इतनी गिर गई कि किसानों ने अपने टमाटर को सड़क पर फेंकना शुरू कर दिया। अब अचानक से टमाटर ने फिर से अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है. दिल्ली में टमाटर का भाव 60 रुपये किलो तक पहुंच गया है. टमाटर के साथ ही हरी सब्जियों के दाम भी आसमान छूने लगे हैं।  चीनी उत्पादन में इस साल होगा भारी इजाफा, नहीं होगी कोई किल्लत | Zee  Business Hindi
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने परिवहन को भी अधिक महंगा बना दिया है, जिससे दाल, चीनी और अन्य सामान पहले की तुलना में अधिक महंगा हो गया है। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए कुछ अंतरराष्ट्रीय स्थितियां भी जिम्मेदार बताई जा रही हैं। सूखे और कोरोना वायरस का दुनिया के चीनी उत्पादक देशों पर बड़ा असर पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह इस साल करीब 20 लाख टन चीनी से एथेनॉल का उत्पादन करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए चीनी को बाजार में नहीं भेजा गया है और डिस्टिलरी में भेजा जाएगा ताकि इथेनॉल तैयार किया जा सके। इथेनॉल की कीमत बढ़ रही है क्योंकि इसे बनाने में चीनी का उपयोग किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची चीनी की कीमत करीब 2,800 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि महाराष्ट्र में चीनी का एक्स-मिल मूल्य 3,400 रुपये प्रति क्विंटल है।

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