गुजरात : जानें नियोनेटल केयर से स्वास्थ्यकर्मियों ने कैसे बचाई नवजात की जान, मां की कोरोना संक्रमित

स्वस्थ हुए नवजात बालक की तस्वीर

बच्चे के दिल की धड़कन घट जाने से डॉक्टरों के सतत उपचार देने से हुआ नार्मल

कोरोना पॉजिटिव एक गर्भवती महिला को 20 अप्रैल को जूनागढ़ सिविल में प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था और 1 मई को गर्भवती माँ के गर्भ में पल रहे बच्चे ने मूवमेन्ट करना बंद कर दिया।   तत्काल स्त्री रोग विभाग में सिजेरियन करने पर मां ने एक बालक को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद नई समस्याएं शुरू हुईं। श्वांस बंद  के बावजूद 9 दिन के इलाज के बाद बच्चा स्वस्थ हुआ। कोरोनाग्रस्त  मां के नवजात बच्चे को  जीवनदान मिला है।
 बाल रोग विभाग के डॉक्टरों की एक टीम को बच्चा सौंप दिया गया था। शिशु को तुरंत सीपीआर देने के साथ नियोनेटल केयर युनिट में बालक की वेंटिलेटर के साथ गहन उपचार  शुरु की गई थी। जन्म के दो-चार घंटे में भी बच्चे को वेन्टीलेटर सहित की उपचार शुरु किया गया था।  सिविल विशेषज्ञ डॉक्टर डॉ. केयूर कणसागरा, डॉ. कल्पेश बाखलकिया, डॉ. धवल देलवाडिया, डॉ. मालदेव ओडेदरा, डॉ. अंकुर पटेल, डॉ. पारूल वाघेला की टीम ने दिन-रात काम किया, तब जाकर  चार दिनों के बाद नवजात बच्चे की स्थिति में सुधार हुआ। बच्चे की सांस लेने की प्रक्रिया और अन्य पैरामीटर सामान्य पर लौट आए। इसके बाद बच्चा पांच दिनों के वेंटिलेटर केयर रिदम इनटेक सर्वाइवल के बाद स्वस्थ हुआ।
बच्चे की मां, अस्मिताबेन कोरोना, सकारात्मक थी। सिविल अस्पताल की उपचार से स्वस्थ होने के साथ  मुस्कुराता हुआ बच्चा हाथ पैर मार रहा था। बच्चे की चिकित्सकों के बाद देखभाल इंचार्ज सिस्टर जागृतिबेन के साथ सिस्टर कोमलबेन, महेश्वरीबेन, अरुणाबेन का भी समान रूप से योगदान रहा। सिस्टर की देखभाल उपचार  बालक एवं माता दोनों के लिए जीवनदाता बने हैं।  गर्भवती माँ से जन्मे नवजात शिशु अभी तक कोरोना पॉजीटिव नही आये हैं।
कोरोना के कठिन समय के दौरान जूनागढ़ सिविल डॉक्टर्स की टीम के नेक काम की प्रशंसा करते हुए, बच्चे के पिता, बिपिनभाई माढक ने कहा, कि "मैंने अपने बच्चों को बचाने के लिए दिन-रात काम कर रहे सिविल डॉक्टर्स को देखा है।" एक निजी अस्पताल ने मुझे चार से पांच लाख का खर्च बताया था। लेकिन यहां मेरे बच्चे एवं पत्नी का उपचार एक भी रुपये बिना खर्च के हु‌आ है। सिविल में वेंटिलेटर नवजात देखभाल इकाई सहित उपचार लोगों के लिए एक आशीर्वाद है।
सिविल अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. केयुर कणसागरा ने बताया कि "एक उच्च जोखिम वाली रोगी और इसके बाद बच्चे को बचाना मुश्किल है,  लेकिन यही हमारे लिए एक चुनौती है।   सिवियर एसफेजिया निदान हो और हमारी टीम ऐसे बालक को बचाकर माता को सौंपे व माता आनंदित हो यही हमारी संतुष्टि है।  

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