अब से गर्भपात कराने वाली नाबालिग लड़कियों के नाम का खुलासा नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहमति से यौन गतिविधि में शामिल नाबालिग को एमटीपी एक्ट के तहत लाभ मिलना चाहिए

देश में अभी तक कानूनन रूप से बलात्कार पीड़ित महिलाओं के नाम उजागर नहीं करने का आदेश है। अब इसमें एक और भाग जुड़ गया है। अब से गर्भपात कराने वाली नाबालिगों के नाम का खुलासा नहीं किया जा सकता है। देश में आजकल किसी न किसी वजह से नाबालिगों के गर्भवती होने की घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों को विशेष रूप से निर्देश दिया है कि गर्भपात के लिए आने वाले नाबालिगों के नाम स्थानीय पुलिस को भी बताए जाने की जरूरत नहीं है।


आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट के तहत अविवाहित महिलाओं को 24 महीने तक का गर्भपात कराने का समान अधिकार दिया था। इस फैसले के एक दिन बाद नाबालिग लड़कियों को भी विशेष लाभ दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहमति से यौन गतिविधि में शामिल नाबालिग को एमटीपी एक्ट के तहत लाभ मिलना चाहिए। कोर्ट ने आगे कहा कि डॉक्टरों को स्थानीय पुलिस को ऐसे नाबालिगों की पहचान का खुलासा करने की आवश्यकता नहीं है। साथ ही एमटीपी अधिनियम के नियम 3बी(बी) का दायरा 18 साल से कम उम्र के नाबालिगों सहित सभी उम्र की महिलाओं तक बढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने सलाह दी कि पोक्सो एक्ट और एमटीपी एक्ट को विस्तार से पढ़ा जाए।


सुप्रीम कोर्ट ने माना कि नाबालिगों को सुरक्षित गर्भपात के अधिकार से वंचित करना विधायिका का इरादा कभी नहीं हो सकता है। हालांकि कोर्ट ने पॉक्सो अधिनियम के तहत कानूनी कार्यवाही में नाबालिगों की पहचान का खुलासा करने से छूट दी गई है। एमटीपी अधिनियम की इस तरह की व्याख्या पोक्सो अधिनियम के तहत अपराध की रिपोर्ट करने के लिए डॉक्टर के वैधानिक दायित्व और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नाबालिग की गोपनीयता और प्रजनन स्वायत्तता के बीच किसी भी संघर्ष को रोकेगी।

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