सूरत में अब अंतिम संस्कार के लिये परिजनों को करना पड़ रहा लंबा इंतजार

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : divyabhaskar.co.in)

आठ से दस घंटे हुआ वेटिंग लिस्ट, बढ़ते कोरोना के केसों के कारण अदालत की कार्यवाही भी की गई स्थगित

सूरत शहर में प्रतिदिन मृतकों के आंकड़ा बढ़ रहा है। इनमें कोरोना और प्राकृतिक रूप से मरने वाले दोनों शामिल हैं। इतने लोगों के प्रतिदिन मरने से सूरत के श्मशानों में जगह की कमी के चलते शवों के अंतिम संस्कार के लिए बारडोली श्मशान तक ले जाने की नौबत आई। विगत दिन बारडोली में छह शव ले जाये गए।
सूरत में हालात इस हद तक बिगड़ चुके हैं कि श्मशान में शवों के दाह संस्कार के लिए टोकन दिए जा रहे हैं। टोकन के अनुसार, जिस व्यक्ति का नंबर होता है, उसके नाम की घोषणा की जाती है और फिर उसका अंतिम संस्कार का नम्बर लगता है।  चिंताजनक बात ये है कि अब तक जो प्रतीक्षा सूची 2 से 4 घंटे थी, वो पिछले दो दिनों में मरने वालों की संख्या में भी वृद्धि के बाद आठ से दस घंटे जितनी हो चुकी है।
वर्तमान में सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि शहर के अस्पताल मरीजों से भरे हुए हैं। ऐसे में जिन कोरोना पॉजिटिव मरीजों को अस्पताल में भर्ती नहीं किया जा सकता उनका इलाज घर पर ही किया जा रहा है। ऐसे मरीजों जिनका घर पर इलाज हो रहा है उनकी मौतों की संख्या भी तेजी से बढ़ गई है। साथ ही कुछ लोगों के खांसी-जुखाम के लक्षण होने पर, वे परीक्षण नहीं करवा रहे हैं और घर पर ही उपचार कर रहे हैं। घरेलू उपचार प्राप्त करने वाले ऐसे रोगियों की मृत्यु में भी वृद्धि हुई है, ऐसे रोगियों को गैर-कोविद माना जाता है और उनका दाह संस्कार कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार नहीं होते हैं। ऐसे लोगों के दाह संस्कार में उनके रिश्तेदार भी शामिल होते हैं। इसके कारण लोगों में संक्रमण का प्रसार का जोखिम बढ़ जाता है।
इस बारे में श्मशान में काम करने वाले लोगों का कहना है कि गैर-कोविड शव के मामले में जब परिजनों से बीमारी का कारण पूछते हैं तब रिश्तेदार कहते हैं कि एक दिन बुखार था और फिर मौत हो गई। बुधवार को सूरत से बारडोली श्मशान में छह शव ले जाए गए। मृतक के रिश्तेदार सुमित गामी ने मीडिया को बताया कि चाचा की सिविल में मृत्यु हो गई। सूरत श्मशान में 10 से 12 घंटे इंतजार करना पड़ा। अंत में शव को बारडोली ले जाकर दाह संस्कार किया गया।

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