भारत में हर पांचवां नागरिक परप्रांतीय श्रमिक

(Photo Credit : khabarchhe.com)

राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक देश में कुल 27.45 करोड़ मजदूरों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है

कोरोना के कारण जब साल 2020 में त्वरित समय में देश में लॉकडाउन की घोषणा हुई तो इससे हर वर्ग के लोगों को तकलीफ हुई। खासकर श्रमिक वर्गों के लिए ये एक बड़ी समस्या की तरह खड़ी हुई थी। वाणिज्यिक और औद्योगिक केंद्रों में काम करने के लिए दूसरे राज्यों से आए परप्रांती श्रमिकों पर दोहरी मार पड़ी। एक ओर तो काम ठप हो गया और दूसरी ओर घर लौटने के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं था।
ऐसे में अब केंद्र सरकार और राज्य सरकार ने ऐसी परिस्थति दुबारा पैदा न हो इसके लिए असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिए विभिन्न योजनाओं की घोषणा की है। इन विज्ञापन के लाभों को श्रमिक वर्ग तक पहुँचाने और उन्हें पंजीकृत करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार साथ में काम कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने माना था कि पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में कुल 27 करोड़ प्रवासी या परप्रांती मजदूरों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। यानी केंद्र सरकार ने माना है कि देश की कुल 138 करोड़ की आबादी में हर पांच में से एक नागरिक परप्रांती श्रमिक है।
केंद्र की ओर से जवाब देते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक देश में कुल 27.45 करोड़ मजदूरों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। यह पोर्टल राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र, भारत सरकार के सहयोग से बनाया गया है। पंजीकरण के संबंध में, शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या केंद्र सरकार पंजीकरण के बाद उपलब्ध जानकारी का उपयोग करने का इरादा रखती है, प्रवासी श्रमिकों को लाभ और सरकार उन्हें कैसे लाभ पहुंचाती है, इस पर कोई योजना थी। इस मामले पर सरकार ने कुछ समय मांगा है इसलिए अब मामले की सुनवाई जुलाई  में होगी।

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