भावनगर के इन चार गांवों में कोरोना का कहर, दो महीनों में 225 मौतें दर्ज हुईं

प्रतिकात्मक तस्वीर

ये गांवा हैं उमराला, वल्लभपुर, चोगठ और लीमडा

राज्य में कोरोना का प्रकोप बढ़ रहा है और साथ ही मौतें भी बढ़ रही हैं। प्रदेश के भावनगर जिले के गांवों में भी हालात ठीक नहीं हैं। विगत दो महीने में भावनगर के चार गांवों में 225 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
गुजराती समाचार पोर्टल खबरछे की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के बीच उमराला और वल्लभपुर अंचल में पॉजीटीव मामलों की संख्या बढ़ रही है। उमराला तालुका के चोगठ रंधोला और लीमडा गांवों में कोरोना के मामले बढ़े हैं। पिछले दो महीनों में उमराला में 35 लोगों की मौत हुई है। चोगठ गाँव में 90, रंधोला में 70 और लीमडा में 35 लोगों की मौत हुई। इन चार गांवों में दो महीने में कुल 225 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि चोगठ गांव की आबादी 12 हजार लोगों की है। इस गाँव में कोरोना ने ऐसा हंगामा मचा रखा है कि शवदाह गृह में लकड़ियां खत्म हो गई। यही कारण है कि कोरोना महामारी के बीच तुरंत नवसारी से लकड़ियों की खेप मंगानी पड़ी। पहले इस गांव में एक महीने में एक-दो लोग मारे जाते थे लेकिन अब पिछले दो महीनों में 90 लोग मारे गए हैं। वहीं चोगठ गाँव में एक ही परिवार के तीन लोगों माँ, बेटे और चाचा की मृत्यु कोरोना के कारण हुई है।
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कोरोना पॉजिटिव के बढ़ते मामलों के बीच भावनगर के उमराला में एक कोविड केंद्र स्थापित किया गया है। केंद्र में 40 बेड की क्षमता है और वर्तमान में सभी बेड भरे हुए हैं। उमराला गांव की आबादी 15 हजार है और 30 लोगों की मौत से गांव हिल गया है। उमराला गांव में कुछ समय पहले दो बेटे और एक पिता, यानी एक ही परिवार के तीन सदस्य मारे गए थे।
ग्रामीणों ने मिनी तालाबंदी की घोषणा की है क्योंकि रंधौला में कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या बढ़ी है। गांव की हालत ऐसी है कि लोगों को इलाज मुहैया कराने के लिए गांव में एक पीएचसी सेंटर है, लेकिन वहां सेवा देने के लिये कोई स्टाफ नहीं है। रंधोला का हेल्थ सेंटर को उमराला तालुका में सबसे बड़ा स्वास्थ्य केंद्र माना जाता है, लेकिन वर्तमान में एक भी कर्मचारी काम नहीं कर रहा है।
चोगठ गांव के निवासी विहा आदेशरा के अनुसार, "एक ही परिवार के मां, बेटे और चाचा की मौत से गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।" इसके अलावा मरीजों के इलाज के लिए गांव में 4 बेड लगाए गए हैं, लेकिन यहां सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। उधर धर्मेंद्र हेजम नामक व्यक्ति ने कहा कि उमराला आध्यात्मिक साधना केंद्र कोविड केयर सेंटर में दवा से लेकर भोजन तक हर चीज उपलब्ध करा रहा है। तालुका के लगभग 50 गांवों को सेनेटाइज किया गया है और 75 बोतल ऑक्सीजन मुफ्त में प्रदान की गई है।

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