ममता के राज में सीबीआई हुई सक्रिय तो यूं गर्मा गई बंगाल की राजनीति

पश्चिम बंगाल में ममता बैनर्जी का राज पुनः कायम कायम होने के बाद लग रहा था कि पिछले कुछ महीनों से गर्माई हुई राजनीति कुछ शांत पड़ेगी। लेकिन सोमवार सुबह बंगाल की राजनीति में मानो तूफान आ गया। 
इस नये घटनाक्रम के पीछे कारण था नारदा स्टिंग मामले की जांच के भाग स्वरुप आरोपियों राज्य के कैबिनेट मत्रीह फिरहाद हकीम, कैबिनेट मंत्री सु्ब्रत मुखर्जी, टीएमसी विधायक मदन मित्रा और पूर्व भाजपा नेता सोवन चैटर्जी के घर पर सीबीआई का छापा और चारों नेताओं को सीबीआई कार्यालय ले जाया जाना। 
विपरीत हालातों में तीव्र प्रतिक्रिया देने के लिये पहचानी जाने वाली मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने अपेक्षा के अनुरूप अपने तेवर दिखाये और खुद सीबीआई कार्यालय पर पहुंच गई। उन्होंने सीबीआई अधिकारियों से ये कहा बताया गया है कि यदि वे इन चारों नेताओं को गिरफ्तार कर रहे हैं, तो उन्हें भी करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार या अदालत की नोटिस के बिना इस प्रकार चारों नेताओं को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
क्या है नारदा स्टिंग मामला : पश्चिम बंगाल में वर्ष 2016 में विधानसभा चुनाव के पहले नारदा स्टिंग टैप सार्वजनिक किये गये थे। दावा किया गया था कि यह टेप 2014 में रिकॉर्ड की गई थी और उसमें टीएमसी के मंत्री, सांसद और विधायक जैसे दिख रहे व्यक्तियों को कथित रूप से एक काल्पनिक कंपनी के प्रतिनिधि से कैश लेने दिखाया गया था। यह स्टिंग ऑपरेशन नारदा न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सेम्युअल ने किया था। कोलकाता हाईकोर्ट ने मार्च 2017 में स्टिंग ऑपरेशन की सीबीआई जांच के ‌आदेश दिये थे। यद्यपि इस स्टिंग में इन चार नेताओं के नाम सामने नहीं आये थे बल्कि ऐसे कई नेताओं के नाम शामिल थे जो फिलहाल भाजपा में शामिल हो चुके हैं। 
राज्यपाल ने दी थी मंजूरी : पिछले दिनों सीबीआई ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से नारदा स्टिंग मामले में फिरहाद हकीम, सुब्रम मुखर्जी, मदन मित्रा और सोवन चैटर्जी के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी मांगी थी। ये सभी उस समय मंत्री थे जब नारदा स्टिंग टेप जारी हुई थी। चुनाव के बाद तुरंत राज्यपाल ने सीबीआई को मंजूरी प्रदान की थी।
पूर्व भाजपा नेता सोवन चैटर्जी ने चुनाव से पहले टीएमसी छोड़ कर भाजपा ज्वॉइन कर ली थी लेकिन टिकट नहीं मिलने पर पुनः भाजपा छोड़ दी थी।

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