ब्लैक फंगस ने ली ममता की परीक्षा; गर्भस्थ शिशु की खातिर मां ने अपनी आंख निकलवा दी!

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credit : Pixabay.com)

कोरोना की मुसीबत अभी समाप्त नहीं हुई कि फंफूद जनित म्युकर माइकोसिस की बीमारी ने लोगों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। सूरत सहित देशभर में इस बिमारी के मरीज प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। कई मामलों में तो मरीजों की हालत अत्यंत गंभीर हो जाने की जानकारी भी सामने आ रही है। अहमदाबाद के निजी हॉस्पिटल में राजस्थान की एक 24 साल की महिला को इस बीमारी के कारण दाखिल किया गया था उसे बचा लिया गया लेकिन उसकी एक आंख निकाल लेनी पड़ी। 
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महिला को समझाना था मुश्किल काम : इस घटना में बहुत ही दर्दनाक पहलू यह है कि यह महिला गर्भवती थी और उसे 4 महीने का गर्भ था। यदि महिला के आंखों को नहीं निकाला जाता तो महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की जान को खतरा था ऐसा डॉक्टर बता रहे हैं। महिला की सर्जरी करने वाले अहमदाबाद के ओक्युलोप्लास्टिक सर्जन डॉक्टर सपन शाह ने बताया कि स्वाभाविक बात है कि कोई महिला अपनी आंखें निकालने के लिए तैयार नहीं होगी लेकिन महिला को अपने बच्चे की जान को बचाने के लिए यह जरूरी था उसे समझाया गया। बड़ी मेहनत के बाद आखिर उसने तैयारी बताई। हालाकि अभी तक इस बीमारी का रिस्क बच्चे पर से नहीं गया है। 
गर्भस्थ शिशु पर अभी भी है खतरा : सर्जरी के पहले महिला के परिवारजनों से मंजूरी ली गई और यह बताया गया कि वह पहले महिला को बचाने का प्रयास करेंगे। इस सर्जरी के बाद महिला तो बच गई लेकिन गर्भस्थ बालक पर से अभी तक रिस्क कम नहीं हुआ है। उसे कुछ भी हो सकता है। फिलहाल परिस्थिति अभी स्थिर है। डॉक्टर ने बताया कि यह रोग और नहीं बढे। इसलिए आंखों को निकालना पड़ा। यदि 2 से 3 दिन का विलंब होता तो मरीज की दोनों आंखों की रोशनी चली जाती है और दोनों आंखें खराब हो सकती थी।

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