अहमदाबाद : बिना किसी उचित कारण के अपने स्वर्गीय पति की संपति नहीं बेच सकती पत्नी-हाई कोर्ट

प्रतिकारात्मक तस्वीर

एक मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सुनाया आदेश

एक मामले पर सुनवाई करते हुए गुजरात उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि एक मां स्वाभाविक रूप से अपने बच्चों की अभिभावक होती है, हालांकि, बच्चों की शिक्षा के खर्च को कवर करने के लिए वह अपने दिवंगत पति की संपत्ति को वैध कारण बताए बिना नहीं बेच सकती है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता महिला ने अपने बेटे की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को सही ठहराते हुए कोई सामग्री नहीं डाली। उसने अपने पति की आय और उसके बैंक खाते का विवरण भी नहीं दिया। अतः आवेदक महिला का यह आवेदन अस्वीकार किया जाता है। वहीं, हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। अभिभावक और वार्ड अधिनियम की धारा 29 नाबालिगों के नाम पर संपत्ति बेचने, उपहार देने, विनिमय करने और पट्टे पर देने के माता-पिता के अधिकारों को परिभाषित करती है। यह प्रक्रिया सिविल कोर्ट की मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती।
मामले के बारे में बताये तो 2019 में एक महिला के पति ने दो अन्य लोगों के साथ मिलकर संपत्ति खरीदी थी। जिसमें तीसरा हिस्सा उनका था। हालांकि, जनवरी 2021 में महिला के पति की मौत के बाद उसकी पत्नी और 16 साल का बेटा उसका कानूनी वारिस बन गया। चूंकि महिला को अपने बेटे की शिक्षा के लिए पैसे की जरूरत थी, इसलिए उसने अपने पति की संपत्ति के हिस्से को बेचने की अनुमति के लिए अदालत में आवेदन किया। महिला के वकील ने तर्क दिया कि चूंकि उसके पास निर्वाह का कोई साधन नहीं था, इसलिए उसके बेटे के भविष्य के लिए संपत्ति को बेचना आवश्यक था। हालांकि निचली अदालत ने याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आय उत्पन्न करने के लिए संपत्ति को किराए पर दिया जा सकता है। ऐसे में बिक्री की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट के सिंगल जज ने इस आदेश को बरकरार रखा है।

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