अहमदाबाद : राजस्थान की 46 साल की ब्रेनडेड महिला का अंगदान कई मरीजों के जीवन को रोशन करेगा

स्टेट ऑर्गन टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन की टीम ने अंग दान के महत्व को समझाने के साथ अंगदान करने के लिए प्रेरित किया

सिविल अस्पताल की SOTTO टीम ने ब्रेन डेड रोगी के परिवार के सदस्यों को अंगदान का महत्व समझाया और परिवार के सदस्य दान करने के लिए सहमत हुए

सिविल अस्पताल में पिछले 10 महीनों के दौरान 20 लोगों के शवों से मिले 68 अलग-अलग अंगों से 54 अलग-अलग लोगों की जान बचाई गई है  :  राकेश जोशी
हमारे समाज में कहा जाता है कि ईश्वर विभिन्न रूपों में जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता के लिए आते हैं। अंगदान के मामले में ब्रेन-डेड मरीज जो अंगदान करते हैं, अंगदान प्राप्त करने वाले रोगियों के लिए भगवान के समान होते हैं, क्योंकि इस तरह के दान ने उनके जीवन को वसंत की तरह खिल उठता है। इसलिए अंगदान को जीवनदान के बराबर माना जाता है।
अहमदाबाद सिविल अस्पताल में अंगदान की गतिविधि जोर पकड़ रही है। सिविल अस्पताल में पिछले 10 माह के दौरान अब तक 20 लोगों के शरीर से मिले 68 अलग-अलग अंगों से अब तक 54 अलग-अलग लोगों की जान बचाई जा चुकी है।
लेटेस्ट  अंगदान की जानकारी देते हुए सिविल अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि मूल रूप से राजस्थान के डूंगरपुर की रहने वाली 46 वर्षीय बसुबेन कलासुआनो का 21 नवंबर को राजस्थान में एक्सीडेंट हो गया था। प्राथमिक डुंगरपुर में होने के बाद उन्हें आगे के इलाज के लिए हिम्मतनगर सिविल अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था। हालत गंभीर होने पर उन्हें इलाज के लिए अहमदाबाद के सिविल अस्पताल लाया गया। जहां 23 नवंबर को उन्हें ब्रेनडेड घोषित कर दिया गया। जब ब्रेनडेड घोषित किया गया, तो उसके परिवार के सदस्यों को सिविल अस्पताल के SOTTO (स्टेट ऑर्गन टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन) की एक टीम ने अंग दान के महत्व को समझाने के साथ अंगदान करने के लिए प्रेरित किया। बसुबेन का परिवार उनकी दोनों किडनी, दो फेफड़े और एक लीवर दान करने के लिए तैयार हो गया। इन अंगों को अब विभिन्न जरूरतमंद मरीजों के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाएगा। जब दोनों फेफड़ों को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए हैदराबाद के एक मरीज को चार्टर्ड फ्लाइट से ट्रांसप्लांट के लिए भेजा गया था। इसी तरह अनेक जीवन में खुशहाली का रंग छा जाएगा। 

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