अहमदाबाद : ट्रैफिक पुलिस द्वारा पीओएस मशीन से जुर्माना भरवाने पर लोगों की मिलीजुली प्रक्रिया

प्रतिकात्मक तस्वीर

डेढ़ महीने में वसूला गया एक करोड़ का जुर्माना, 1 करोड़ में से सिर्फ 11 लाख रुपए का डिजिटल जुर्माना

ट्रैफिक पुलिस द्वारा डिजिटल जुर्माना वसूलने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पीओएस मशीन शुरू से ही बंद जैसी हालात में आ चुकी है। इस मशीन से डेढ़ महीने में 1.05 करोड़ की वसूली की गई। इनमें से सिर्फ 10 फीसदी ने ही डिजिटल जुर्माना अदा किया। आने वाले दिनों में इस मशीन का अधिकतम लाभ उठाकर परियोजना को सफल बनाने का प्रयास किया जाएगा।
जानकरी के अनुसार, यातायात विभाग ने 135 जगहों पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर पीओएस मशीन से जुर्माना लगाया है। पीओएस मशीनों से डिजिटल जुर्माना वसूलने के लिए शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट फेल होने के कगार पर है। क्योंकि डेढ़ महीने में 20 हजार चालकों को मेमो दिया गया है और 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है। जिसमें से लगभग 2200 मेमो को डिजिटल पेनल्टी रसीद प्राप्त हुई है और 11 लाख रुपये की वसूली की गई है यानी 90 लाख जुर्माना नकद में जमा किया गया है, इसका अर्थ है कि केवल 10% लोग डिजिटल जुर्माना अदा कर रहे हैं।
आपको बता दें कि पीओएस मशीन से जुर्माना वसूलना यातायात विभाग के लिए भारी पड़ सकता है क्योंकि अगर एक मशीन में 5 डिजिटल ट्रांजैक्शन नहीं होते हैं तो एक महीने की सभी मशीनों को कुल रु 70 हजार का भाड़ा चुकाना पड़ेगा। लेकिन चूंकि मौजूदा डिजिटल जुर्माना ज्यादा नहीं निकलता है, इसलिए आने वाले दिनों में कितना किराया दिया जाता है यह पता चल सकता है। अभी भी आने वाली कुछ समस्याओं को दूर करने के लिए पीओएस मशीन में क्यूआर कोड विकल्प जोड़ा जाएगा। ताकि आसानी से जुर्माना भरा जा सके।
वर्तमान में युवा पीओएस मशीनों के अधिक उपयोग के साथ डिजिटल माध्यम को अपना रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर, वृद्ध लोग इसे अस्वीकार करते दिख रहे हैं। हालांकि यदि कोई व्यक्ति कहता है कि उसने नियम नहीं तोड़े हैं, तो मशीन के पीछे लगे कैमरे में ली गयी फोटो की मदद ली जाती है,और यदि कोई व्यक्ति जुर्माना भरने से हिचकिचाता है, तो उसे तुरंत फोटो दिखा दी जाती है। और मौके पर ही जुर्माना ले लिया जाता है।

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