अहमदाबाद : 'परिवार' के बीच चुनावी जंग! मामा-फुआ के बेटे के बीच एक ही सीट पर सियासी मुकाबला

रिश्ते को दोनों भाई चुनाव मैदान में हैं

अहमदाबाद की वेजलपुर विधानसभा सीट से एक ही परिवार के दो उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं

विधानसभा चुनाव अब बेहद करीब हैं। जहां उम्मीदवारों ने फॉर्म भरकर प्रचार शुरू कर दिया है, वहीं अहमदाबाद की वेजलपुर विधानसभा सीट से एक ही परिवार के दो उम्मीदवार चुनाव लड़ने जा रहे हैं। दोनों उम्मीदवार एक ही सीट पर अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़ेंगे। हालांकि, दोनों भाई फिलहाल जोरशोर में प्रचार कर रहे हैं। राजनीति का रंग ही ऐसा है। यहां तक ​​कि जहां संबंध आते है, वहां इस पर ध्यान नहीं दिया जाता है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि राजनीति में चुनावी मैदान में होने वाले की ही जीत और हार होती है! दोनों प्रत्याशी एक-दूसरे के रिश्ते में भाई हैं। दोनों भाइयों के पारिवारिक संबंध बहुत अच्छे हैं। वेजलपुर के स्थानीय लोग दोनों उम्मीदवारों से परिचित हैं।

दोनों चचेरे भाइयों ने अलग-अलग पार्टियों से नामांकन किया है

यहां हम बात कर रहे हैं वेजलपुर से कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र पटेल और आप प्रत्याशी कल्पेश पटेल की। दोनों चचेरे भाइयों ने अलग-अलग पार्टियों से नामांकन किया है। फिलहाल दोनों भाई वेजलपुर सीट पर एक दूसरे के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। वे अपनी पार्टी की बात जनता के सामने रख रहे हैं। तब आप प्रत्याशी कल्पेश पटेल ने अपने ही भाई पर हमला बोलते हुए कहा कि राजू राजनीति में नए हैं और सक्रिय नहीं हैं।
साथ ही आपको बता दें कि 2007 में आप के मौजूदा उम्मीदवार कल्पेश पटेल ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा था और एलिसब्रिज निर्वाचन क्षेत्र से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने 2012 और 2017 में वेजलपुर विधानसभा का टिकट मांगा, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसलिए उन्होंने कहा कि राजू के लिए रास्ता साफ हो गया क्योंकि मैं कांग्रेस से हट गया।

परिवार को लेकर प्रत्याशियों का मानना ​​है कि वे परिवार वालों की विचारधारा के अनुसार फैसला करेंगे

उधर, कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र पटेल भी अपने चचेरे भाई के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। गली-गली... गली-गली.. जुबानी तौर पर आम आदमी पार्टी और बीजेपी पर हमलावर हैं। साथ ही वह अपने भाई को चुनावी रण में हराने के लिए दिन-रात प्रचार कर रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्रभाई ने अपने ही भाई कल्पेश पटेल पर निशाना साधते हुए कहा कि टिकट न मिलने के डर से उन्होंने दलबदल किया है। उन्होंने यह भी कहा कि मेरा भाई लड़ाई में नहीं है और उसका अस्तित्व भी नहीं है।
हालांकि परिवार को लेकर प्रत्याशियों का मानना ​​है कि वे परिवार वालों की विचारधारा के अनुसार फैसला करेंगे। वेजलपुर सीट का इतिहास देखें तो वेजलपुर सीट सालों से बीजेपी का गढ़ रही है। हर बार यह सीट कांग्रेस के लिए कांटे की ताज साबित होती है। तो इस बार भी कुछ ऐसा ही हो रहा है क्योंकि ये दोनों चचेरे भाई आपस में लड़ते रहेंगे और प्रचार करते रहेंगे और तीसरा जीत जाएगा। यानी बीजेपी फिर से दो भाइयों की लड़ाई में मैदान मार सकती है।

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